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बिहार शरीफ में भाकपा माले का 14वां जिला सम्मेलन,: चुनाव आयोग की नई नीति पर उठाए सवाल; संदीप सौरभ ने कहा- लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश है – Nalanda News

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बिहार शरीफ में भाकपा माले का 14वां जिला सम्मेलन,:  चुनाव आयोग की नई नीति पर उठाए सवाल; संदीप सौरभ ने कहा- लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश है – Nalanda News

बिहार शरीफ में भाकपा माले का 14वां जिला सम्मेलन,: चुनाव आयोग की नई नीति पर उठाए सवाल; संदीप सौरभ ने कहा- लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश है – Nalanda News

बिहार शरीफ में भाकपा माले का 14वां जिला सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय सम्मेलन में विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति बनेगी। साथ ही नई जिला कमेटी का गठन किया जाएगा। उद्घाटन नालंदा लोकसभा सीट से पार्टी के प्रत्याशी रहे और पालीगंज से विधायक संदी

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सभा को संबोधित करते हुए संदीप सौरभ ने कहा, ‘जिला सम्मेलन पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। सम्मेलन के बाद नई जिला कमिटी का गठन होगा। आने वाले समय में देश, बिहार और नालंदा की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। नई टीम संघर्ष की राह तय करेगी।

पहले चुनाव आयोग का गठन प्रधानमंत्री, विपक्षी नेता और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा किया जाता था। अब इसमें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है। अब दो सरकारी व्यक्ति और एक विपक्षी व्यक्ति हैं। जिससे सरकार अपनी मर्जी के लोगों को चुनाव आयोग में नियुक्त कर सकती है।’

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कार्यक्रम में मौजूद पार्टी के कार्यकर्ता।

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लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश है

विधायक संदीप सौरभ ने आगे कहा, ‘चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव से ठीक पहले एक नया परिपत्र जारी किया है। जिसमें राज्य के 8 करोड़ वोटरों से एक महीने के भीतर अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराने को कहा गया है।

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वोटरों को न केवल अपने दस्तावेज बल्कि माता-पिता के जन्म प्रमाण पत्र भी जमा करने होंगे। नहीं करने पर नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा। यह सीधे-सीधे लोकतंत्र को जड़ से खत्म करने की साजिश है। इस प्रक्रिया से कम से कम 2 करोड़ नौजवानों, बुजुर्गों, गरीबों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की योजना है।

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EVM पर उठाए सवाल

विधायक संदीप सौरभ ने 2003 में हुई मतदाता सत्यापन प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि उस समय यह जिम्मेदारी चुनाव आयोग की थी। प्रक्रिया विधानसभा चुनाव से दो साल पहले शुरू की गई थी। अब आप कह रहे हैं कि एक महीने में 8 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन होगा। जिम्मेदारी जनता की होगी, चुनाव आयोग की नहीं।

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दुनिया के अधिकांश देशों ने ईवीएम का उपयोग बंद कर दिया है। वे बैलेट पेपर का उपयोग करना चाहते हैं ताकि मतदाताओं में यह विश्वास हो सके कि उनका वोट सही जगह गया है।

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बिहार में बदलाव जरूरी है

सम्मेलन में मौजूद भाकपा माले के नेताओं ने कहा कि पिछले 20 साल से बिहार ठहराव की स्थिति में है। शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो रही। नौजवानों को रोजगार नहीं मिल रहा, किसान-मजदूर परेशान हैं। बिहार में बदलाव के लिए सरकार बदलना जरूरी है।

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