बम ऐसा फटा कि निचला जबड़ा अलग हो गया: 4 गायों के आहार नली तक पत्थर फंसे, खाना-पीना बंद; डॉक्टर बोले- जिंदा रहने की उम्मीद कम – Betul News h3>
बैतूल जिले में हुई एक घटना ने इंसानियत को झकझोर दिया है। यहां के शाहपुर ब्लॉक के कोयलारी गांव में खेत किनारे तालाब पर पानी पीने पहुंचीं गायों ने आटे की गोली समझकर विस्फोटक चारा खा लिया। जैसे ही उन्होंने उसे चबाया, जोरदार धमाका हुआ, उनके जबड़े उड़ गए।
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उनका निचला जबड़ा पूरी तरह टूटकर लटक चुका है। वे न खाना खा पा रहे और न पानी पी पा रहे। डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताते हुए बचने की संभावना बहुत कम जताई है। पढ़िए यह रिपोर्ट…
पहले देखिए तस्वीरें
इस तरह आटे के गोले बनाकर रखे गए थे।
हादसे की वजह से गाय की मौत भी हो गई।
बम फटने से गायों के जबड़े फट गए। गायें इतनी ज्यादा घायल हैं कि वे खा-पी भी नहीं सकेंगी।
धमाके से गाय के शरीर का हिस्सा अलग होकर दूर जा गिरा।
खेत के पास मिले बारूद भरे गोले
घटना 5 मई की है। ग्रामीणों की सूचना पर भौंरा चौकी पुलिस और पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची। जांच में सामने आया कि खेत किनारे तालाब के पास आटे और दाल में लिपटे बारूद भरे गोले रखे गए थे। नर्मदापुरम से बुलाए गए बम स्क्वॉड ने मौके से 9 और विस्फोटक गोले बरामद कर सुरक्षित तरीके से नष्ट किए।
आरोपी इटारसी से गिरफ्तार
पुलिस जांच में पता चला कि जिस खेत के पास विस्फोटक मिले, वह कोयलारी निवासी राकेश चौहान का है। घटना के बाद आरोपी परिवार सहित गांव से फरार हो गया था। पुलिस ने उसे इटारसी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया।
पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि उसने जंगली सूअरों को मारने के लिए ये “सूअर मार बम” रखे थे। उसने बताया कि फसल खराब होने से परेशान होकर उसने बारूद वाले गोलों पर आटा और दाल चिपका दी थी, ताकि सुअर उन्हें खा लें।
आरोपी के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम और BNS की धारा 325 के तहत केस दर्ज किया गया है। प्रारंभिक पड़ताल में उसके खिलाफ फिलहाल कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है।
पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
डॉक्टर बोले- जबड़े बुरी तरह फटे, पत्थर गले तक घुसे
पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक सुरजीत सिंह ने बताया कि विस्फोट मवेशियों के मुंह में चबाते समय हुआ। बमों में बारूद के साथ छोटे-छोटे पत्थर भरे गए थे, जिससे उनके जबड़े बुरी तरह फट गए।
डॉक्टरों के मुताबिक कई पशुओं के निचले जबड़े पूरी तरह टूट चुके हैं। पत्थर भोजन नली तक पहुंच गए हैं। ऐसे में वे खाना-पानी नहीं ले पा रहे। स्थिति फेटल है और अगले 48 घंटे बेहद अहम हैं।
वन विभाग भी करेगा जांच
डीएफओ उत्तर नवीन गर्ग ने कहा कि मामले की जांच वन्यजीव एंगल से भी की जाएगी। घटनास्थल सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से सटे इलाके में है, इसलिए सभी जलस्रोतों और वाटर होल के आसपास निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी छोटे से तालाबनुमा जलाशय में गायें पानी पीने आई थीं।
जंगल और वन्यजीवों के लिए भी खतरा
विशेषज्ञों ने इस तरह के विस्फोटक चारे को “चारा बम” बताया है। सतपुड़ा बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष आदिल खान ने कहा कि जंगल से सटे इलाकों में इस तरह के बम वन्यजीवों के लिए भी बड़ा खतरा हैं।
उन्होंने बताया कि गर्मी में पानी की तलाश में जंगली सूअर, हिरण, नीलगाय, भालू और तेंदुए जैसे जानवर जलस्रोतों के पास आते हैं। ऐसे में यह विस्फोटक किसी भी वन्यजीव की जान ले सकता है।
डीएफओ ने कहा- वन्यजीव एंगल से होगी जांच
वन विभाग के डीएफओ उत्तर नवीन गर्ग ने कहा कि इस मामले की जांच वन्यजीव एंगल से भी कराई जाएगी। एसडीओ फॉरेस्ट उत्तम सिंग शास्तिया ने बताया कि घटना स्थल जंगल से सटा हुआ है और यह क्षेत्र वन्य प्राणियों की आवाजाही का हिस्सा माना जाता है। यहां सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की सीमा लगी हुई है।
उन्होंने माना कि यदि इस तरह के विस्फोटक चारे का इस्तेमाल किया जा रहा है तो यह वन्यजीवों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। जंगल में सभी जलस्रोत और वॉटर होल के आसपास जांच करने, निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
इंसानों के लिए भी खतरनाक
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आटे में लिपटे ये विस्फोटक गोले बच्चों या ग्रामीणों को सामान्य खाद्य पदार्थ जैसे लग सकते हैं, अगर कोई इन्हें छेड़े तो बड़ा हादसा हो सकता है। एसपी वीरेंद्र जैन ने बताया कि आरोपी के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम और बीएनएस की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है।
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