झांसी में बुर्का-नकाब के पोस्टर को लेकर मौलाना का बयान: कारी इसहाक गोरा बोले-ये तानाशाही फरमान, देश में महिलाओं के सम्मान और आजादी पर है प्रतिबंध – Saharanpur News h3>
देवबंदी उलेमा कारी इसहाक गोरा का फाइल फोटो।
यूपी के झांसी में कुछ ज्वेलरी दुकानों पर लगाए गए पोस्टरों ने सियासी और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। इन पोस्टरों में कथित तौर पर लिखा गया है कि बुर्का, नकाब या घूंघट में आने वाली महिलाएं गहने नहीं खरीद सकेंगी। दुकानदारों का तर्क है कि चोरी की घटनाओं
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देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा-देखिए, झांसी में जिस तरह से दुकानों पर ये पोस्टर लगाए गए हैं कि बुर्के, नकाब या घूंघट में कोई भी महिला गहने नहीं खरीद सकेगी—यह एक किस्म का तानाशाही फरमान है। यह कहीं न कहीं कानून का उल्लंघन करता है और महिलाओं की आजादी को चुनौती देता है।
मौलाना कारी इसहाक गोरा ने सवाल उठाया कि एक तरफ देश में महिलाओं के सम्मान और आजादी की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी तरफ उन पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा-एक तरफ हम महिलाओं की आजादी की बातें करते हैं, महिलाओं के सम्मान की बातें करते हैं, और दूसरी तरफ उन्हीं पर पाबंदी लगाई जाती है। ये दोहरा रवैया और दोहरी राजनीति है, जो बिल्कुल भी उचित नहीं है।
उन्होंने कहा-दुकानदारों द्वारा चोरी की घटनाओं का हवाला देने पर मौलाना ने कहा कि ये कोई नया मुद्दा नहीं है। बुर्का एक अरसे से पहना जा रहा है। अगर चोरी रोकनी है तो उसके लिए कानूनी और तकनीकी उपाय मौजूद हैं, सीसीटीवी, सुरक्षा गार्ड, पहचान सत्यापन जैसे कई तरीके हो सकते हैं। लेकिन किसी खास पहनावे को टारगेट करना गलत है।
उन्होंने कहा कि बुर्का या घूंघट को चोरी से जोड़ना समाज में नफरत और भेदभाव को बढ़ावा देता है। ये कहना कि नकाब में महिलाएं पहचान में नहीं आतीं, इसलिए उन पर रोक लगाई जाए—यह तर्क अस्वीकार्य है। पहचान के लिए कई तरीके हैं, लेकिन धार्मिक या सांस्कृतिक पहनावे पर रोक लगाना समाधान नहीं।
मौलाना कारी इसहाक गोरा ने सरकार और प्रशासन से इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए कहा-सरकार और प्रशासन को ऐसे लोगों पर तत्काल एक्शन लेना चाहिए, जिन्होंने इस तरह के पोस्टर लगाए हैं। यह न सिर्फ समाज को बांटने वाला कदम है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ भी है।




