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गंभीर मरीज को एम्बुलेंस देने में लापरवाही: नर्मदापुरम में सिविल सर्जन को नोटिस; VVIP ड्यूटी विवाद में मरीज दो घंटे फंसा रहा – narmadapuram (hoshangabad) News
गंभीर मरीज को एम्बुलेंस देने में लापरवाही: नर्मदापुरम में सिविल सर्जन को नोटिस; VVIP ड्यूटी विवाद में मरीज दो घंटे फंसा रहा – narmadapuram (hoshangabad) News h3>
नर्मदापुरम जिला चिकित्सालय में एक गंभीर घायल मरीज को रेफर करने में लापरवाही बरती गई। अस्पताल की सिविल सर्जन डॉक्टर सुनीता कामले मरीज को समय पर 108 एम्बुलेंस नहीं दिला पाईं। एसपीएम से डोनेट एंबुलेंस होने के बावजूद सिविल सर्जन ने सीएमएचओ डॉक्टर नरसिंह गहलोत को यह कहकर मना कर दिया कि यह एंबुलेंस वीवीआईपी ड्यूटी के लिए है। मरीजों के परिवहन के लिए नहीं है। इतना ही नहीं सिविल सर्जन पर “डीजल की व्यवस्था कौन करेगा?” कहने का भी आरोप है। मामले में शुक्रवार को सीएमएचओ डॉ. नरसिंह गहलोत ने सिविल सर्जन डॉ. सुनीता कामले को नोटिस जारी किया है। पत्र में उल्लेख किया कि सिविल सर्जन ने शासकीय एबुलेंस होने के बावजूद अमानवीय रवैया अपनाते हुए मरीज को एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई। कहा गया कि एंबुलेंस वीवीआईपी ड्यूटी के लिए है। उन्होंने लिखा कि आप महत्वपूर्ण पद पर होने के बावजूद मरीजों के हितों का ध्यान नहीं रखते हुए काम में दायित्वों में लापरवाही बरत रही है। जिसके लिए उन्हें नोटिस जारी कर उपस्थित होकर जवाब मांगा है। यह है मामला…
सिवनीमालवा ब्लॉक के ग्राम खारदा निवासी 40 वर्षीय सुरेन्द्र चौहान को सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद गुरुवार को इलाज के लिए जिला चिकित्सालय नर्मदापुरम लाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ने उन्हें भोपाल रेफर कर दिया। आरोप है कि मरीज के परिजनों द्वारा भोपाल ले जाने के लिए 108 एम्बुलेंस की मांग की गई, लेकिन जिला मुख्यालय पर तत्काल कोई वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें लगभग दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। मरीज के परिजन अस्पताल परिसर में भटकते रहे और मरीज की हालत लगातार गंभीर बनी रही। वीवीआईपी ड्यूटी के लिए एंबुलेंस होना बताया
कलेक्टर और सीएचएमओ से परिजनों ने मदद की गुहार लगाई। सीएमएचओ ने सिविल सर्जन को निर्देश दिए कि जिला चिकित्सालय की नवीन एम्बुलेंस से मरीज को भेजा जाए। बावजूद वीवीआईपी ड्यूटी के लिए एंबुलेंस होना बताया। मरीजों के परिवहन के लिए उपयोग नहीं किया जाता। सीएमएचओ ने इसे गंभीर लापरवाही और अमानवीय रवैया बताते हुए कहा है कि यदि शासकीय एम्बुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद मरीज को सुविधा नहीं दी गई, तो यह मरीज हितों की उपेक्षा तथा सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। पत्र में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3(1), 3(2) एवं 3(3) के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है। सिविल सर्जन ने आरोप को नकारा
जिला अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. सुनीता कामले ने इन आरोपों को लेकर कहा कि 108 एंबुलेंस नहीं होने पर सरकारी एंबुलेस मैंने खड़ी करवाई। वीवीआईपी ड्यूटी के लिए एम्बूलेंस कहने वाली बात से उन्होंने साफ इनकार किया।