काला कानून कब बदलेगा?: सरकारी नौकरी मिली तो 3 साल ट्रेनी ही रहेंगे, ठेका कर्मियों से भी कम स्टायपेंड – Bhopal News h3>
सरकारी नौकरी की तैयारी में सालों लगाने वाले युवाओं के लिए ये खबर किसी झटके से कम नहीं। मध्यप्रदेश में कर्मचारी चयन मंडल और विभागीय परीक्षा से चुने गए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को नियुक्ति के बाद सीधे ‘कर्मचारी’ नहीं माना जाता, बल्कि पहले
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इस अवधि में न उन्हें पूरा वेतन मिलता है न यह सेवा वरिष्ठता, पदोन्नति या पेंशन के लिए गिनी जाती है। ट्रेनी को सिर्फ स्टायपेंड मिलता है, जो ठेका कर्मचारियों से भी कम होता है। उदाहरण के लिए, जिन संविदा कर्मचारियों को मूल वेतन का 90% यानी 17,550 रुपए मिलते हैं, वहीं चयन मंडल से आए ट्रेनी को महज 11,700 रुपए मिलते हैं।
हालांकि लोक सेवा आयोग से चयनित होने वालों के साथ ये स्थिति नहीं है। उन्हें पहले दिन से पूरा वेतन मिलता है। यही कारण है कि असंतोष बढ़ रहा है। जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ समय में 1500 लोग नौकरी छोड़ चुके हैं। हाल ही में मंत्रालय सेवा के तीन कर्मचारियों ने भी इस्तीफा दे दिया।
छह साल में 1.5 लाख भर्तियां : 6 सालों में प्रदेश में करीब 1.50 लाख नियुक्तियां इस नियम के तहत की गई हैं। इनमें शिक्षक, पटवारी, एएसआई, कांस्टेबल, नापतौल निरीक्षक और सहकारिता निरीक्षक जैसे पद शामिल हैं।
नुकसान… पेंशन, पदोन्नति व वरिष्ठता के लिए भी तीन साल की ये अवधि मान्य नहीं की जाती
फर्क…सरकारी जॉब में स्टायपेंड 11700 रु., इसलिए 1500 से कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके
बाकी किसी और राज्य में ये नियम नहीं, सिर्फ मध्यप्रदेश में क्यों?
स्टायपेंड और प्रोबेशन पीरियड तीन साल किए जाने की व्यवस्था कांग्रेस सरकार ने मप्र के साथ छत्तीसगढ़ में भी की थी, पर वहां 12 सितंबर 2023 को यह प्रावधान खत्म कर दिया गया है। पहले दिन से कर्मचारी को 100% वेतन मिल रहा है।
2019 में बनाए नाथ सरकार के नियम को ढो रही भाजपा
- 12 दिसंबर 2019 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सेवा भर्तियों के नए नियम बनाए। प्रावधान किया गया कि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी पदों पर सीधी भर्ती से चयनित अभ्यर्थियों को 3 साल प्रोबेशन पीरियड में रखा जाएगा।
- पहले साल में न्यूनतम वेतन का 70%, दूसरे में 80%, तीसरे साल में 90% राशि (स्टायपेंड के रूप में) दी जाएगी।
- प्रोबेशन पीरियड सफलतापूर्वक पूरा होने पर चौथे साल में वेतन प्रारंभ किया जाएगा। सभी 54 विभागों के सेवा भर्ती नियमों में इसे लागू कर दिया गया।
- पिछले विधानसभा चुनाव के ठीक पहले पूर्व सीएम शिवराज ने इसे काला कानून बताते हुए प्रोबेशन पीरियड 3 साल से घटाकर पूर्ववत दो साल करने और पहले साल में 70% और दूसरे में 100% वेतन देने की घोषणा की थी। बावजूद, बदलाव नहीं हुआ।
लेकिन इस व्यवस्था को बदलने की फिलहाल योजना नहीं
- वित्त के प्रमुख सचिव बोले- सीधी भर्तियों में वर्तमान व्यवस्था लागू रहेगी। फिलहाल प्रोबेशन पीरियड दो साल करने या पहले साल से पूरा वेतन दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है।
- एसीएस जीएडी संजय दुबे बोले- प्रोबेशन पीरियड में स्टायपेंड की वर्तमान व्यवस्था यथावत है। इसमें किसी तरह के बदलाव का प्रस्ताव नहीं है।



