‘आर्मी के साथ आतंकियों से लड़े, सरकार ने घर उजाड़ा’: मंत्री बोले- पता नहीं किसने आदेश दिया; वन विभाग ने तोड़ी 60 साल पुरानी बस्ती h3>
80 साल के अब्दुल रज्जाक अपने टूटे घर के मलबे के पास उदास बैठे रहते हैं। 2001 में वे कश्मीर से भागकर जम्मू आए थे। सिधरा एरिया में घर बनाया। 25 साल हो गए रहते हुए। 19 मई को वन विभाग वाले बुलडोजर लेकर आए और अब्दुल समेत करीब 25 घर तोड़ दिए। ये दूसरी बार ह
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अभी जम्मू में गर्मी रिकॉर्ड तोड़ रही है। अब्दुल टीन की जिस छत के नीचे बैठे मिले, वह 43 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में तप रही थी। बच्चे जमीन पर सोए थे। यही हाल बाकी परिवारों का भी है। ये सभी गुज्जर और बकरवाल समुदाय से हैं, जो आतंकवाद से बचने के लिए कश्मीर से पलायन करके आए थे। उनका आरोप है कि हमें बताया नहीं गया कि आखिर घर क्यों तोड़े गए। वहीं, प्रशासन का कहना है कि ये घर वन विभाग की जमीन पर कब्जा करके बनाए गए थे। ये बस्ती करीब 60 साल पुरानी थी।
अब्दुल की कहानी से समझिए सिधरा में क्या हुआ…
अब्दुल साउथ कश्मीर के कोकेरनाग में रहते थे। काशवान गांव में घर था। अब्दुल ने 2001 में कश्मीर छोड़ा, तब आतंकवाद चरम पर था। इसी साल जम्मू-कश्मीर विधानसभा और श्रीनगर एयरपोर्ट पर हमला हुआ। इसी साल आतंकियों ने श्रीनगर के महजूर नगर में 6 सिखों, डोडा में 43 और राजौरी में 15 हिंदुओं की हत्या कर दी थी।
अब्दुल बताते हैं, ‘आतंकियों को रोकने के लिए हमने सेना को अपने गांव में बुलाया था। इसलिए हम उनके टारगेट पर आ गए। आतंकी कहते थे कि तुम आर्मी के साथ रहते हो। हिंदुस्तानी मुखबिर हो। तुम्हारा खानदान खत्म कर देंगे। इसलिए मुझे घर छोड़ना पड़ा। घर कच्चा हो या पक्का, कौन छोड़ सकता है, लेकिन हमें छोड़ना पड़ा।’
अब्दुल थोड़ा चुप होते हैं, फिर कहते हैं, ‘अब ये वक्त आया है। फिर घर टूट गया। कोई नोटिस नहीं मिला। वन विभाग के स्टाफ के साथ पुलिसवाले आए और बाहर निकलने के लिए कहा। तब पता चला कि घर टूटने वाला है। हमें दूर धकेल दिया गया। सामान तक नहीं बचा पाए। बर्तन, कागजात सब मलबे के नीचे दब गए। रिलीफ कमिश्नर ऑफिस से माइग्रेंट राशन कार्ड मिला था, वो भी मिट्टी में दबा है।
रज्जाक और उनकी पत्नी खातून रजिस्टर्ड कश्मीरी माइग्रेंट हैं। मुफ्त राशन के साथ परिवार के हर सदस्य को 3,250 रुपए महीना सरकारी मदद मिलती है। दामाद मंजूर अहमद, बेटी जरीना बेगम, उनके बच्चे समीर और अफसाना, सभी रजिस्टर्ड माइग्रेंट हैं। उनका घर भी तोड़ दिया गया। सभी टूटे घरों की जमीन पर लगाए तंबुओं में रह रहे हैं।
दूसरा किरदार: समीया
प्रभावित लोगों में समीया का परिवार भी शामिल है। घर में कुल 9 लोग हैं, 6 बहनें, एक भाई और अम्मी-अब्बू। समीया कहती हैं, ‘हम यहीं पैदा हुए और यहीं बड़े हुए। जिस रात हमारा घर गिराया गया, तभी से खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। दिन में गर्मी से बचने के लिए पेड़ों के नीचे बैठे रहते हैं और रात में खुले में सोते हैं। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। उनकी हालत बहुत खराब है।’
समीया का परिवार अब भी टूटे घर में रह रहा है। एक छोटा बच्चा है, जो मलबे के बीच ही पल रहा है।
30 साल के इनायत अली बताते हैं, ‘बुलडोजर की कार्रवाई सुबह बहुत जल्दी की गई। हम लोग इसके लिए तैयार नहीं थे। सुबह करीब 4:30 बजे मैं नमाज पढ़कर उठा ही था कि बाहर शोर सुनाई दिया। बुलडोजर पहले ही आ गए थे। पुलिसवाले लोगों को बाहर खींच रहे थे। बच्चों को भी बाहर निकाल दिया। 40 से 50 पुलिसवाले थे। हमें कुछ भी निकालने का वक्त नहीं मिला। सब कुछ खत्म हो गया।’
‘जम्मू-कश्मीर में करीब एक लाख प्रवासी रजिस्टर्ड हैं। हम सरकारी मदद पर ही जिंदा हैं। हर महीने की मदद और राशन, हमारे पास बस यही है। हमें नहीं पता सरकार ने हमारे घर क्यों तोड़े। फिर उसी सरकार ने हमें तंबू और चादरें दी हैं। लोग भी खाना और जरूरी सामान दे रहे हैं। इसी तरह गुजारा चल रहा है।’
सरकार और कुछ NGO ने प्रभावित परिवारों को रहने के लिए टेंट दिए हैं। ये तंबू टूटे घर की जमीन पर ही लगाए गए हैं।
तीसरा किरदार: फातिमा बी
60 साल की फातिमा बी का घर भी गिरा दिया गया। वे बताती हैं, ‘हम बैठे हुए थे, तभी अचानक इलाके को घेर लिया गया। कुछ ही मिनटों में घर तोड़ना शुरू कर दिया। हम पूछते रहे कि हमारी गलती क्या है। हमारे पास सारे कागज हैं। आधार कार्ड, बिजली और पानी के बिल देख लो। आखिर किस आधार पर हमें हटा रहे हो। हमने घर बनाने के लिए 30 लाख रुपए का लोन लिया है।’
‘हमसे कहा कि तुम कश्मीरी हो। यहां 50 साल से गुज्जर और बकरवाल रह रहे हैं। अगर हम कश्मीरी हैं, तो हमारी भी पहचान होनी चाहिए। किसी ने हमारी बात नहीं सुनी।’
BJP का आरोप: उमर अब्दुल्ला सरकार कब्जे के जरिए डेमोग्राफी बदल रही
सिधरा की इस बस्ती के बारे में दावा है कि ये कब्जा करके बसाई गई थी। इसे हटाने मई में प्रदर्शन भी हुआ था। 13 मई को BJP विधायक विक्रम रंधावा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सिधरा में जम्मू-नागरोटा नेशनल हाईवे को दो घंटे तक बंद कर दिया था। प्रदर्शनकारियों ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर जम्मू में अतिक्रमण को बढ़ावा देने और क्षेत्र की डेमोग्राफी बदलने का आरोप लगाया।
इसके तुरंत बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी। वन विभाग के अधिकारी पुलिस के साथ बुलडोजर लेकर आए और महामाया मंदिर के पास बसी बस्ती हटाकर एरिया खाली करा लिया।
मंत्री बोले- सरकार को नहीं पता बस्ती उजाड़ने का आदेश किसने दिया
इस एक्शन पर सवाल भी उठ रहे हैं कि कार्रवाई का आदेश किसने दिया था। प्रभावितों से मिलने पहुंचे वन, उमर सरकार में पर्यावरण एवं जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद राणा ने हैरानी जताते हुए कहा, ‘ये कार्रवाई सरकार की जानकारी के बिना की गई। मैंने अफसरों से बात की, इससे समझ आया कि किसी भी विभाग ने घर तोड़ने का आदेश नहीं दिया था। सरकार में किसी ने भी निर्देश जारी नहीं किए, तो यह कैसे हुआ। मामले की जांच के लिए दो कमेटियां बनाई गई हैं, जो जिम्मेदारी तय करेंगी।’
उधर, जम्मू के मुख्य वन संरक्षक डॉ. वीएस सेंथिल कुमार बताते हैं कि सरकार ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई है। इसके बाद सारे फैक्ट्स सामने आ जाएंगे।
अब्दुल्ला सरकार बनने के बाद सरकारी जमीन पर बने 1400 घर-दुकानें तोड़ी गईं
अक्टूबर 2024 में उमर अब्दुल्ला की सरकार बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में 1400 से ज्यादा घर और दुकान अवैध बताकर तोड़े गए हैं। मुख्यमंत्री उमर उब्दुल्ला ने विधानसभा के विंटर सेशन में बताया कि इनमें 1,194 घर और 231 कमर्शियल प्रॉपर्टी शामिल हैं।
हाल ही में सरकार ने विधानसभा में बताया कि जम्मू-कश्मीर में 17.27 लाख कनाल, यानी 2,15,875 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा था। इसमें से 14.29 लाख कनाल जमीन खाली कराई जा चुकी है। जम्मू रीजन इस लिस्ट में सबसे ऊपर है, जहां 14 लाख कनाल से ज्यादा सरकारी जमीन पर कब्जा है।
…………………………….. जम्मू-कश्मीर से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें वंदे भारत से 5 घंटे में जम्मू से श्रीनगर, 855 रुपए किराया, सुरक्षा में CORAS कमांडो
30 अप्रैल से जम्मू और श्रीनगर के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस चलने से घाटी में बदलाव दिख रहा है। पहले कश्मीर से जम्मू जाने के लिए नेशनल हाईवे ही इकलौता रास्ता था। वो भी लैंडस्लाइड या बर्फबारी की वजह से अक्सर बंद हो जाता है। जम्मू-श्रीनगर के बीच 270 किमी की दूरी है। यहां रोड कनेक्टिविटी हमेशा बड़ी चुनौती रही है। वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू होने से ये सफर सिर्फ 5 घंटे का रह गया है। किराया सिर्फ 855 रुपए। सुरक्षा की वजह इस ट्रेन में CORAS कमांडो तैनात रहते हैं। पढ़ें पूरी खबर…


