आज का एक्सप्लेनर: बांग्लादेश में सियासी भूचाल, सेना प्रमुख से क्यों टकराए मोहम्मद यूनुस; क्या इस्तीफा देकर यूरोप भागेंगे; क्या शेख हसीना वापस लौटेंगी h3>
शेख हसीना का तख्तापलट हुए 10 महीने भी नहीं हुए और बांग्लादेश में फिर उथल-पुथल है। पिछले 5 दिनों में हालात बहुत तेजी से बिगड़े और खबरें आईं कि अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं। बांग्लादेशी सेना प्रमुख जनरल वकार के
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मोहम्मद यूनुस के इस्तीफे तक बात कैसे पहुंची, सेना प्रमुख और राजनीतिक दलों से उनकी क्यों ठनी और बांग्लादेश में आगे क्या होगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: आखिर बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के इस्तीफे तक बात कैसे पहुंची?
जवाब: इस सब की शुरुआत होती है 10 महीने पहले जुलाई 2024 से। बांग्लादेश में अवामी लीग सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। धीरे-धीरे ये प्रदर्शन हिंसक विद्रोह में बदल गया और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा। उन्हें भारत ने पनाह दी।
अब सवाल था कि देश कौन चलाएगा? इसलिए नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुआई में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ। उन्हें प्रमुख सलाहकार बनाया गया। इस अंतरिम सरकार को प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं के अलावा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात–ए-इस्लामी समेत कई राजनीतिक दलों और बांग्लादेशी सेना ने पूरा समर्थन दिया था।
अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस का झुकाव शुरुआत से ही शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले छात्र नेताओं की तरफ रहा। इन छात्र नेताओं ने नेशनल सिटिजन पार्टी यानी NCP बनाई। BNP अक्सर यूनुस सरकार पर NCP के प्रति समर्थन का आरोप लगाती रही है।
वहीं, यूनुस सरकार ने ‘मानवीय कॉरिडोर’ समेत कई अहम मुद्दों पर BNP और दूसरी पार्टियों के साथ सलाह मशविरा नहीं किया। इससे पार्टियों में भारी नाराजगी है। कई और मुद्दों पर भी यूनुस सरकार के खिलाफ देश में राजनीतिक प्रदर्शन हो रहे हैं, आंदोलन की तैयारी चल रही है। इस पर यूनुस ने निराशा जाहिर की है।
दरअसल, 20 मई 2025 को बंद कमरे में एक मीटिंग हुई। इसमें मोहम्मद यूनुस और बांग्लादेश की तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल थे। ऊपर से देखने पर तो ये एक सामान्य मीटिंग थी, लेकिन इसी के बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार के सभी सलाहकारों को बुलाकर कहा कि वो इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं।
8 अगस्त 2024 को मुहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया के तौर पर शपथ ली थी।
सवाल-2: बांग्लादेश के सेना प्रमुख और मोहम्मद यूनुस के बीच किस बात पर ठन गई है?
जवाब: बांग्लादेशी अखबार ‘The Daily Star’ की रिपोर्ट के मुताबिक जनरल वकार 21 मई को ढाका कैंटोनमेंट में एक बड़ी बैठक को संबोधित कर रहे थे। इसमें देशभर के अफसर कॉम्बैट ड्रेस में मौजूद थे। जनरल वकार ने कहा- बांग्लादेश को राजनीतिक स्थिरता चाहिए और यह केवल एक चुनी हुई सरकार से ही संभव है, न कि किसी बिना चुने गए प्रशासन से।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस साल दिसंबर तक देश में चुनाव करवाए जाने चाहिए। हालांकि मोहम्मद यूनुस का कहना है कि चुनाव 2026 के मध्य से पहले नहीं होंगे।
जनरल वकार यूनुस सरकार के कुछ और फैसलों के भी खिलाफ हैं। जैसे म्यांमार के राखिन में एक मानवीय कॉरिडोर खोलने के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा- कोई गलियारा नहीं होगा। बांग्लादेश की संप्रभुता कोई सौदेबाजी का विषय नहीं है।
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा कोई कदम बांग्लादेश को किसी और के युद्ध में खींच सकता है। उन्होंने साफ कहा- ऐसे फैसले सिर्फ एक चुनी हुई राजनीतिक सरकार ही ले सकती है।
दरअसल, यूनुस सरकार ने पिछले दिनों ऐसे ही कुछ और नीतिगत फैसले लिए। जैसे- चटगांव पोर्ट का मैनेजमेंट विदेशी कंपनी को देना, इलॉन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक को मंजूरी देना। जनरल वकार ने कहा- सेना किसी को भी हमारी संप्रभुता के साथ समझौता नहीं करने देगी।
सेना प्रमुख के इन बयानों से साफ दिख रहा है कि वो अंतरिम सरकार के फैसलों से परेशान हैं। बांग्लादेश में सेना और सरकार के रिश्ते बिगड़ रहे हैं।
सवाल-3: जब यूनुस को बांग्लादेश की कमान सौंपी गई थी, तब क्या तय हुआ था?
जवाब: 8 अगस्त 2024 को मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया के तौर पर शपथ ली थी। उन्होंने रक्षा, शिक्षा, ऊर्जा और सूचना जैसे 27 मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। अंतरिम सरकार में यूनुस के साथ एक दर्जन से ज्यादा सलाहकार भी हैं। इस सरकार के एजेंडों में तय किया गया…
- देश में शांति की बहाली और हर पक्ष से बातचीत: जिस वक्त ये अंतरिम सरकार बनी, तब बांग्लादेश में हिंसा और उथल-पुथल थी। ऐसे में शांति की बहाली जरूरी थी। साथ ही छात्रों, समाज और आम लोगों के हर पक्ष से समावेशी बातचीत करना, उनकी मांगों को पूरा करना था। अगस्त 2024 में यूनुस ने कहा था, ‘मैं संविधान को बनाए रखूंगा। उसकी रक्षा और शांति के लिए काम करूंगा।।’
- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना: यूनुस की अंतरिम सरकार को जल्द से जल्द स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाकर देश की बागडोर जनता की चुनी हुई सरकार को सौंपनी थी। शुरुआत में यूनुस ने भी कहा था कि उनकी सरकार जल्द से जल्द स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराएगी, पर चुनाव टलते जा रहे हैं।
सवाल-4: क्या वाकई मोहम्मद यूनुस देश में चुनाव नहीं कराना चाहते हैं?
जवाब: मोहम्मद युनुस चुनाव कराने की बात कई बार कह चुके हैं। एक बार उन्होंने कहा था कि जून 2026 तक देश चुनाव के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन उन्होंने क्लियर डेडलाइन नहीं बताई थी। उन पर सेना और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का दबाव बढ़ता जा रहा है।
इसके अलावा यूनुस को कुर्सी पर बनाए रखने के लिए भी सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक लामबंदी की जा रही है। पूरे ढाका शहर में यूनुस के समर्थन में पोस्टर लगे हुए हैं, जिन पर लिखा है- ‘यूनुस को पांच साल तक सत्ता में बनाए रखो’ और ‘सुधार पहले, चुनाव बाद में’।
यूनुस के आलोचकों का मानना है कि वह प्रेशर स्ट्रैटजी का इस्तेमाल करके सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। उनके समर्थक देशभर में चुनावों के खिलाफ रैली कर रहे हैं।
बांग्लादेश की राजनीति को करीब से समझने वाले सीनियर जर्नलिस्ट सुबीर भौमिक लिखते हैं, ‘यूनुस 1972 के धर्मनिरपेक्ष संविधान को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। ये एक ऐसी मांग है, जिसके बाद राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन चुप्पू को हटाकर शायद यूनुस को उनकी जगह पर लाया जा सकता है। उनके आलोचकों का आरोप है कि वह उत्तर कोरिया के किम जोंग-उन की तरह ताउम्र राष्ट्रपति बने रहना चाहते हैं।’
सवाल-5: क्या आर्मी चीफ जनरल वकार-उज-जमान तख्तापलट करने की फिराक में हैं?
जवाब: नेशनल सिटिजन पार्टी यानी NCP के नेता और अंतरिम सरकार में पूर्व सलाहकार नाहिद इस्लाम ने बांग्लादेश में तख्तापलट होने और सैन्य सरकार बनने की आशंका जताई। उन्होंने कहा, ‘बांग्लादेश में तख्तापलट का इतिहास रहा है और सेना का रोल अब भी पावरफुल बना हुआ है। ऐसे में 1/11 स्टाइल मिलिट्री बैक्ड गवर्नमेंट यानी सैन्य समर्थित सरकार फिर से उभर सकती है, जो लोकतंत्र और जनता के खिलाफ है। सेना का काम देश की रक्षा करना है, न कि राजनीति।’
ये तस्वीर ढाका की बताई जा रही है, जहां बांग्लादेशी आर्मी के जवान तैनात हैं।
दरअसल, बांग्लादेश में सेना ने देश के अलग-अलग हिस्सों में गश्त बढ़ा दी है। बांग्लादेशी अखबार ‘Dhaka Tribune’ ने रिपोर्ट किया है कि पिछले कुछ दिनों में सेना ने ऑपरेशंस में तेजी लाई है। इसके लिए कई जगहों पर तैनाती बढ़ाई गई है। सेना के जवान और अफसर बख्तरबंद गाड़ियों के साथ देशभर में एक्टिव हैं। कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेना और एजेंसियों ने पिछले महीने दो हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया। अगस्त 2024 से अब तक सेना ने करीब 10 हजार लोगों को हिरासत में लिया है।
हालांकि इस पूरे मसले का दूसरा पहलू भी है। दरअसल, आर्मी चीफ जनरल वकार-उज-जमान को प्रो-डेमोक्रेसी और भारत-समर्थक माना जाता है। वह चाहते हैं कि देश में जल्द से जल्द चुनाव हो। जनता के चुने हुए नेता देश संभालें और पुलिस-प्रशासन कायम हो।
इसके अलावा जनवरी से मार्च के बीच जनरल वकार का तख्तापलट करने की खबरें आती रहीं। बांग्ला आर्मी के लेफ्टिनेंट जनरल फैजुर रहमान ने डिवीजनल कमांडरों और सैन्य अधिकारियों को जनरल वकार के खिलाफ लामबंद करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें भरपूर समर्थन नहीं मिल पाया।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI भी कहीं न कहीं शामिल थी। इसके बाद जनरल वकार ने सभी सैन्य अधिकारियों को चेतावनी दी और ले. जन. रहमान को निगरानी में रखा गया।
सवाल-6: अगर मोहम्मद यूनुस सच में इस्तीफा देंगे, अगर देश छोड़ना पड़ा तो कहां जा सकते हैं?
जवाबः NCP के नेता नाहिद इस्लाम का कहना है कि अगर देश के सभी वर्ग इस तरह असहयोग करेंगे तो डॉ. यूनुस इस्तीफा दे देंगे। हमने उनसे अनुरोध किया है कि वे इस्तीफा न दें, लेकिन चुनाव से पहले न्याय जरूरी है।
राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि मोहम्मद यूनुस के इस्तीफे पर विचार करने की बात सिर्फ भावनात्मक थी। वो फिलहाल इस्तीफा नहीं देंगे।
शनिवार को मोहम्मद यूनुस ने सलाहकार परिषद की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक के बाद प्लानिंग एडवाइजर वाहिदुद्दीन महमूद ने कहा- मोहम्मद यूनुस हमारे साथ बने रहेंगे। वो इस्तीफा नहीं दे रहे। न्यूज एजेंसी यूएनबी के मुताबिक सलाहकार परिषद की एक बैठक के बाद जल्द मंत्रियों के साथ बैठक होगी।
हालांकि बांग्लादेश में राजनीतिक परिस्थितियां बहुत तेजी से बदलती हैं। अगर मोहम्मद यूनुस को इस्तीफा देना पड़ा और देश छोड़ना पड़ा, तो इन दो जगहों पर जा सकते हैं…
- अमेरिका: मोहम्मद यूनुस ने यहां लंबे समय तक पढ़ाई की और काम किया, विशेष रूप से वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी में। इसके अलावा, अमेरिका से नजदीकी और नोबेल पुरस्कार विजेता के रूप में उनकी स्थिति को देखते हुए अमेरिका उनके लिए एक सुरक्षित जगह हो सकती है।
- यूरोपीय देश: यूनुस के नोबेल शांति पुरस्कार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ संबंधों को देखते हुए वे किसी यूरोपीय देश, जैसे फ्रांस, जर्मनी, या नॉर्वे में शरण ले सकते हैं, जहां उनके माइक्रो फाइनेंस के काम को काफी सराहा जाता है।
बांग्लादेशी-स्वीडिश लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने ‘X’ पर लिखा,
सुना है कि मोहम्मद यूनुस इस्तीफा देने वाले हैं। वे बाकी जिंदगी यूरोप या अमेरिका में आराम से गुजारेंगे। मेरा मानना है कि उन्हें उनके अपराधों के लिए ताउम्र जेल में डाल देना चाहिए। उन्हें क्यों बख्शा जाए?
यूनुस को जेल भेजने की वजहें बताते हुए तस्लीमा लिखती हैं, ‘बांग्लादेश में जैसे ही यूनुस आए, उनके खिलाफ पांच मामले खारिज कर दिए गए। उन्होंने पद पर रहते हुए जिहादी उग्रवादियों और भीड़ को उकसाया, विपक्ष को खत्म करने के लिए नफरत फैलाई, तौहीदी भीड़ को खून-खराबे के लिए उकसाया। बहुत लोगों को नुकसान हुआ, कई की जानें गईं। उन्होंने देश में अशांति ला दी। उन्होंने अनगिनत निर्दोषों को जेल में डाल दिया। उन्होंने कॉरिडोर और बंदरगाह को विदेशी सैन्य शक्तियों को सौंप दिए और पड़ोसियों के साथ रिश्ते बर्बाद कर दिए।’
सवाल-7: इस पूरे हंगामे पर बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना का क्या कहना है?
जवाबः बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना शुरुआत से ही मोहम्मद यूनुस और उनकी अंतरिम सरकार के खिलाफ बयान देती रही हैं। हाल ही में उन्होंने ‘Facebook’ पर पोस्ट लिखी कि यूनुस देश को अमेरिका को बेच रहे हैं।
हसीना ने यूनुस पर आरोप लगाते हुए लिखा, ‘उन्होंने आतंकियों की मदद से सत्ता हथियाई है। हमने इन आतंकियों से बांग्लादेश के लोगों की रक्षा की। एक आतंकी हमले के बाद हमने कड़े कदम उठाए थे। कई को गिरफ्तार किया। अब उन्हें रिहा कर दिया गया है, जेलें खाली हैं। अब बांग्लादेश में उन आतंकियों का शासन है।’
उन्होंने लिखा, ‘हमारे महान बंगाली राष्ट्र का संविधान हमने लंबे संघर्ष और मुक्ति संग्राम से हासिल किया है। अवैध रूप से सत्ता पर कब्जा किए इस उग्रवादी नेता को संविधान को छूने का हक किसने दिया? उसके पास जनादेश नहीं है, कोई संवैधानिक आधार नहीं है। मुख्य सलाहकार पद का भी कोई आधार नहीं है और वह अस्तित्व में नहीं है। इसलिए वह संसद के बिना कानून कैसे बदल सकते हैं, यह अवैध है। उन्होंने अवामी लीग पर बैन लगा दिया है।’
जुलाई-अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के कारण बांग्लादेश की तत्कालीन पीएम शेख हसीना को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा था।
सवाल-8: क्या चुनाव होने की स्थिति में शेख हसीना बांग्लादेश में वापसी कर सकती हैं?
जवाबः शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़कर जाने के बाद उनकी पार्टी अवामी लीग के नेता साजिब अहमद ने कहा था, ‘बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल होते ही शेख हसीना वापसी करेंगी। साथ ही अगले चुनावों में अवामी लीग चुनाव लड़ेगी।’
मार्च 2025 में USA अवामी लीग की उपाध्यक्ष रब्बी आलम ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा था कि हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के तौर पर वापसी करेंगी। युवाओं ने गलती की है, लेकिन ये उनकी गलती नहीं है, उनके साथ छल किया गया है।
अमेरिकी थिंकटैंक विल्सन सेंटर में साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर माइकल कुगेलमैन के मुताबिक, ‘दक्षिण एशिया में वंशवादी राजनीति का इतिहास देखें, तो समझ आता है कि ऐसी पार्टियों की वापसी संभावना को कभी खारिज नहीं किया जा सकता है, भले ही वे खत्म होती दिख रही हों। शेख हसीना भी वंशवादी राजनीति से आती हैं। उनकी वापसी के कयास लगाए जा सकते हैं।’
बांग्लादेशी थिंक टैंक सेंटर फॉर गवर्नेंस स्टडीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जिल्लुर रहमान के मुताबिक, ‘शेख हसीना और उनकी पार्टी के लिए अगले दशक तक बांग्लादेशी राजनीति में कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का कोई रास्ता नहीं है। अगर अंतरिम सरकार बुरी तरह फेल हो जाती है तो बेशक इसमें बदलाव आ सकता है।’
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