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‘कश्मीरी पंडितो का कसाई’ कहा जाने वाला बिट्टा कराटे कौन है?

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जम्मू-कश्मीर में जब भी हालात ख़राब हुए हैं, तो सन् 1990 को ज़रूर याद किया जाता है। ऐसा क्या हुआ था घाटी में जो आज कश्मीर की तुलना उसी दौर से की जा रही है जिस दौर में कश्मीरी पंडितों को घाटी से पलायन करना पड़ा था। आज के मजमून में, मैं आपको उस गाथा से रूबरू करवाऊँगा जो कश्मीर के माज़ी का सबसे दर्दनाक सत्य है। जिस पर विचार विमर्श तो खूब किए जाते हैं, लेकिन उस विमर्श को अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया गया।

कश्मीर के श्रीनगर के गुरु बाज़ार में फ़ारुक़ अहमद डार नाम के एक शख़्स का घर है। इन हज़रत की धर्म पत्नी असबाह आरज़ूमंद ख़ान कश्मीरी ब्यूरोक्रेट हैं। फ़ारुक़ का दूसरा नाम बिट्टा कराटे है। बिट्टा वहीं खूँखार आतंकवादी है जिसने 1990 के विद्रोह में 20 से अधिक कश्मीरी पंडितों की हत्या की थीं। यही नहीं, बिट्टा कराटे ने BSF के काफिले पर भी हमला किया था। जिसमें कई भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।

बिट्टा कराटे आज जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के वरिष्ठ नेता है। वर्ष 1988 में जेकेएलएफ के कमांडर अश्फ़ाक़ अहमद मजीद, बिट्टा कराटे को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुज़फ़्फ़राबाद ले गया था। यहाँ बिट्टा कराटे को 32 दिन का आतंकी प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद बिट्टा को वापस भारत प्रशासित कश्मीर भेज दिया गया। वापस आने के बाद बिट्टा ने कश्मीरी पंडितों की जानकारी इकट्ठा करना शुरू कर दी। उच्च पदों के कश्मीरी पंडितों को ख़बर भी न थी कि उनकी जानकारी पीओके पहुँचाई जा रही है।

कश्मीरी पंडितों को घाटी से बाहर करने का मसौदा पीओके में ही तैयार हुआ था। 19 जनवरी जब भी कश्मीरी पंडित सुनते हैं तो उनके अंबक नम पड़ जाते हैं। उस रात का मंज़र तसव्वुर में आ जाता है, जिस रात उन्हें घाटी छोड़कर भागना पड़ा। घाटी में कश्मीरी पंडितों को डराने का सिलसिला एक महीने पहले से ही शुरू कर दिया गया था। मस्जिदों के लाउड स्पीकर से फरमान सुनाया जाता ‘ए काफिरों घाटी को छोड़ दो या फिर हमारे साथ मिल जाओं, कश्मीर में रहना है तो अल्लाह हू अकबर कहना है। यहाँ क्या चलेगा निज़ाम-ए-मुस्तफ़ा।’ यह नारे कश्मीरी पंडितों को डराने के लिए काफ़ी थे।

कश्मीरी पंडित भलि भाँति समझ गए थे कि अब उनकी महिलाएँ बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं और यहीं से शुरू हुआ कश्मीरी पंडितों को निकालने और मारने का सिलसिला। फ़ारुक़ अहमद डर का नाम बिट्टा कराटे इसलिए पड़ा क्योंकि उस कराटे में निपुणता प्राप्त थी। बिट्टा के कत्ल करने का वीडियो तो मौजूद नहीं मगर इंडिया टुडे के संवाददाता का वीडियो मिल जाता है, जो स्वयं बिट्टा से बात करते हैं और सवाल करते हैं कि आखिर बिट्टा कराटे ऐसा क्यों कर रहा था।

बिट्टा उस दौरान तमाम अपने अपराधों को कबूलता है जो उसने किए थे। बिट्टा अपनी ज़ुबानी इस बात को मानता है उसने 20 से अधिक कश्मीरी पंडितों की हत्या की। नौसिखिए बिट्टा कराटे ने उस वीडियो में अपनी माँ का कत्ल करने की बात भी कही। इस साक्षात्कार में बिट्टा ने माना उसके किए गुनाहों की सज़ा फाँसी है, जो उसे मंज़ूर है।

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