Advertising
<

करवा चौथ कब है और क्या है इसकी मान्यता?

876
news
करवा चौथ कब है और क्या है इसकी मान्यता?

करवाचौथ का व्रत और पूजन बहुत विशेष है. क्योंकि इस बार 70 साल बाद ऐसा योग बन रहा है. इस दिन रोहिणी नक्षत्र और मंगल का योग एक साथ आ रहा है. करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग होना अपने आप में एक अद्भुत योग है. ज्योतिष के अनुसार यह योग करवाचौथ को और अधिक मंगलकारी बना रहा है. इससे करवा चौथ व्रत करने वाली महिलाओं को पूजन का फल हजारों गुना अधिक मिलेगा.

करवा चौथ के दिन इस बार चंद्रोदय रात 8 बजकर 16 मिनट पर होगा, जिसमें आप चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना करवा चौथ का व्रत पूर्ण कर सकती हैं. पंचांग के अनुसार इस दिन चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 4 नवंबर 2020 की सुबह 4 बजकर 24 मिनट पर होगा और चतुर्थी तिथि की समाप्ति अगले दिन 5 नवंबर 2020 को सुबह 6 बजकर 14 मिनट पर होगी.

करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग होना अपने आप में एक अद्भुत योग है. करवाचौथ रविवार के दिन होने से इसका महत्व और बढ़ गया है. चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्यभामा योग बन रहा है. यह योग चंदमा की 27 पत्नियों में सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी के साथ होने से बन रहा है. पति के लिए व्रत रखने वाली सुहागिनों के लिए यह बेहद फलदायी होगा.

ऐसा योग भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा के मिलन के समय भी बना था. यह योग न केवल कुछ ही समय के लिए बल्कि पूरे दिन के लिए बन रहा है, जिसमें करवा चौथ का व्रत रखने पर महिलाओं को अपने व्रत का कई गुना लाभ की प्राप्त होगा. सर्वार्थ सिद्धि योग शुभ योगों में से एक माना जाता है. इस योग में किया गया कोई भी कार्य अवश्य ही सफल होता है और साथ ही उस कार्य का कई गुना लाभ भी प्राप्त होता है.

सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख के लिए रखती हैं तो वहीं कुंवारी लड़कियां यह व्रत सुयोग्य जीवनसाथी पाने के लिए रखती हैं. यह व्रत न केवल सुहागन महिलाओं के लिए बल्कि कुंवारी लड़कियों के लिए भी विशेष होता है. इस दिन कुंवारी लड़कियां भी सुयोग्य जीवनसाथी पाने के लिए व्रत रखती हैं. साल 2020 में करवा चौथ का पर्व 4 नवबंर 2020 के दिन मनाया जाएगा. इस दिन यदि करवा चौथ पूजन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो यह शाम 5 बजकर 29 मिनट से शाम 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगा.

यह भी पढ़े: क्या बम्बई शहर को दहेज में दिया गया था?