पानी की समस्या से निपटने के लिए देश के राज्यों में क्या उपाय हो रहे हैं
पानी मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए बहुत जरूरी है. पानी के बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
पानी मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए बहुत जरूरी है. पानी के बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती. कुछ रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि साल 2030 तक देश की लगभग 40% आबादी के लिए जल उपलब्ध नहीं होगा. इतना ही नहीं यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि न सिर्फ जीवन के लिए यदि ऐसे ही हालात बदलते रहे तो 2050 तक जल की समस्या के कारण भारत की GDP को 6% तक का नुकसान हो सकता है.

जल की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर उपाय ढुँढने में लगी हुई हैं. राजस्थान सरकार की तरफ से पानी की समस्या से निपटने के लिए राज्य जल नीति 2010 बनाई गई थी. इसके साथ ही राजस्थान सरकार की तरफ से नदी जोड़ों कानून भी पारित किया गया. जिसका उद्देश्य नदियों को जोड़कर पानी की समस्या से छुटकारा पाना था. इसके अलावा 20 अगस्त,2019 को राजीव गाँधी जल संचय योजना की शुरूआत की गई.

भारत के राज्य बिहार और मध्यप्रदेश में भी लोगों को पीने के पानी के लिए अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. जिसके लिए हर घर नल जल योजना की शुरूआत की गई. जिसका उद्देश्य नल के द्वारा लोगों के घरों में पानी को पहुँचाना है. महाराष्ट्र सरकार ने भी जलयुक्त शिवार(गाँव) योजना की शुरूआत की. इसका उद्देश्य भी लोगों के पीने के पानी की समस्या का उपाय करना था.
यह भी पढ़ें: क्या शिक्षा और भगवान को अलग करना सही होगा
पानी की समस्या आज के समय में एक बहुत बड़ी समस्या बनकर हमारे सामने हैं. जिसके लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार की तरफ से अनेंक कदम उठाए जा रहें हैं. कई राज्य सरकारों ने नई योजना लागू की है, लेकिन इस समस्या के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की जरूरत है.



