झारखंड के दो गैंगस्टर विदेश से चला रहे थे अपराध का साम्राज्य, इंटरपोल ने जारी किया रेड कॉर्नर नोटिस
झारखंड में कोयला कारोबारियों और ठेकेदारों के बीच आतंक का पर्याय बन चुके दो गैंगस्टरों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिकंजा कस गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विदेश में बैठकर राज्य में आपराधिक…
झारखंड में कोयला कारोबारियों और ठेकेदारों के बीच आतंक का पर्याय बन चुके दो गैंगस्टरों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिकंजा कस गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विदेश में बैठकर राज्य में आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले राहुल सिंह और राहुल दुबे के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया है। झारखंड पुलिस मुख्यालय की सिफारिश पर यह कार्रवाई की गई है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि भी हो चुकी है।
इन दोनों गैंगस्टरों के गुर्गों ने पिछले दो सालों में धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़ से लेकर रांची तक 100 से ज्यादा आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया है। इनके निशाने पर मुख्य रूप से कारोबारी, कोयला व्यापारी, ठेकेदार और निर्माण कंपनियां रहती हैं, जिनसे फोन या अन्य डिजिटल माध्यमों से रंगदारी मांगी जाती है। रकम न मिलने पर उनके ठिकानों पर फायरिंग कर दहशत फैलाई जाती है।
कौन हैं राहुल सिंह और राहुल दुबे?
पुलिस के मुताबिक, राहुल सिंह पहले कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू गिरोह का प्रमुख सदस्य था। मार्च 2025 में पुलिस मुठभेड़ में अमन साहू के मारे जाने के बाद कथित तौर पर उसने गिरोह की कमान संभाल ली। उसका नेटवर्क रांची, रामगढ़, पलामू, बोकारो, चतरा, हजारीबाग और लातेहार समेत कई जिलों में सक्रिय है। वहीं, राहुल दुबे गिरोह भी लगातार आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देकर पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।
हाल की घटनाएं और पुलिस की कार्रवाई
हाल ही में 29 अक्टूबर की रात हजारीबाग के एके इंटरनेशनल होटल पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की जिम्मेदारी राहुल दुबे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ली थी। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी। 30 अक्टूबर को रांची पुलिस ने एक मुठभेड़ के बाद राहुल दुबे गिरोह के पांच कथित शूटरों और उनके मुख्य हथियार सप्लायर जियाउल हबीब को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि दोनों गिरोहों के 60 से अधिक अपराधियों की गिरफ्तारी के बावजूद धमकी, रंगदारी और फायरिंग की घटनाएं नहीं रुकी हैं।
रेड कॉर्नर नोटिस का क्या होगा असर?
रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद इंटरपोल के सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां इन गैंगस्टरों की पहचान और गिरफ्तारी में मदद करेंगी। हालांकि, यह नोटिस सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता, लेकिन इसके आधार पर संबंधित देश की एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं। गिरफ्तारी होने पर भारत सरकार प्रत्यर्पण प्रक्रिया के जरिए दोनों को वापस लाने का प्रयास करेगी। यह कदम झारखंड पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि इससे विदेश में छिपे अपराधियों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी।
इनपुट: IANS



