सोमवार, 2 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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ईरान की अमेरिका को दो-टूक: मांगें मानें तो 48 घंटे में खुल सकता है होर्मुज जलडमरूमध्य

ईरान ने अमेरिका के सामने एक बड़ी पेशकश रखते हुए कहा है कि अगर उसकी 'वैध' मांगें मान ली जाती हैं, तो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सिर्फ दो दिनों के भीतर फिर से खोला जा सकता है…

ईरान की अमेरिका को दो-टूक: मांगें मानें तो 48 घंटे में खुल सकता है होर्मुज जलडमरूमध्य
(फोटो: IANS)

ईरान ने अमेरिका के सामने एक बड़ी पेशकश रखते हुए कहा है कि अगर उसकी 'वैध' मांगें मान ली जाती हैं, तो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सिर्फ दो दिनों के भीतर फिर से खोला जा सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बयान ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने तेहरान में एक साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया।

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बाघेई ने ज़ोर देकर कहा कि इस मामले में आगे की पूरी ज़िम्मेदारी अब अमेरिका के फैसले पर टिकी है। उन्होंने बताया कि ईरान ने पहले इस प्रक्रिया के लिए सात-दिवसीय योजना का प्रस्ताव दिया था, जिसे अब अपनी सकारात्मक मंशा दिखाने के लिए घटाकर सिर्फ दो दिन कर दिया गया है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के ज़रिए होने वाली किसी भी अप्रत्यक्ष बातचीत का आधार यही संशोधित योजना होगी।

शर्तें और पृष्ठभूमि

ईरानी प्रवक्ता ने अपनी मांगों को 'स्पष्ट, उचित और तार्किक' बताते हुए कहा, "जब तक अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म नहीं करता और तेहरान की 'वैध' मांगों को नहीं मानता, तब तक कोई समझौता नहीं होगा और न ही होर्मुज स्‍ट्रेट को दोबारा खोला या सुरक्षित बनाया जाएगा।"

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि यह गतिरोध 28 फरवरी को तेहरान समेत कई ईरानी शहरों पर इजरायल और अमेरिका के कथित संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ था। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई लहरें चलाईं और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। ईरान ने अपनी शर्तों वाली सात-दिवसीय योजना सितंबर में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका को सौंपी थी।

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है, क्योंकि खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देशों से कच्चे तेल और LNG का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है।

इनपुट: IANS

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