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बनासकांठा: बनास डेयरी के फ्रेंच फ्राइज़ प्लांट का विस्तार, PM मोदी 30 अक्टूबर को करेंगे ई-लोकार्पण

बनासकांठा जिले के आलू उत्पादक किसानों के लिए एक बड़ी खबर में, बनास डेयरी अपने फ्रेंच फ्राइज़ प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता को दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्टूबर को…

बनासकांठा: बनास डेयरी के फ्रेंच फ्राइज़ प्लांट का विस्तार, PM मोदी 30 अक्टूबर को करेंगे ई-लोकार्पण
(फोटो: IANS)

बनासकांठा जिले के आलू उत्पादक किसानों के लिए एक बड़ी खबर में, बनास डेयरी अपने फ्रेंच फ्राइज़ प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता को दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्टूबर को वाव-थराद जिले के सणादर गांव में स्थित इस विस्तारित प्लांट का ई-लोकार्पण करेंगे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विस्तार से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय किसानों को बेहतर दाम और बाजार के नए अवसर भी मिलेंगे।

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डेयरी ने ₹51.65 करोड़ के निवेश से इस प्लांट का विस्तार किया है। इस अपग्रेडेशन के बाद, प्लांट की उत्पादन क्षमता 2 टन प्रति घंटे से बढ़कर 5 टन प्रति घंटे हो जाएगी। बनास डेयरी ने अप्रैल-2026 में फ्रेंच फ्राइज़ के उत्पादन और पैकिंग लाइन की क्षमता बढ़ाने का यह काम शुरू किया था।

बनासकांठा: आलू उत्पादन का गढ़

यह विस्तार इस क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि बनासकांठा आलू उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है। पिछले 25 वर्षों में, यहां प्रोसेसिंग-ग्रेड आलू की खेती का रकबा 400 हेक्टेयर से बढ़कर 61,016 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में जिले में लगभग 18.7 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ, जिसमें प्रति हेक्टेयर उत्पादकता करीब 30 टन रही। यहां की उपजाऊ भूमि और जलवायु इसे चिप-ग्रेड और फ्रेंच फ्राइज़-ग्रेड आलू के लिए आदर्श बनाती है।

'सीड टू फ्राई': किसानों के लिए सुनिश्चित आय

बनास डेयरी ने 2019 में अमूल ब्रांड के तहत फ्रेंच फ्राइज़ बाजार में कदम रखा था। तब से इसने 'सीड टू फ्राई' नामक एक एकीकृत प्रणाली विकसित की है। इस प्रणाली के तहत, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) जैसे संस्थानों से रोगमुक्त जर्मप्लाज्म लेकर उसे टिशू कल्चर लैब में विकसित किया जाता है। इसके बाद किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जाते हैं और फसल की खरीद कीमत बीज देते समय ही तय कर ली जाती है। इस व्यवस्था के तहत, डेयरी ने 2023-24 में आलू किसानों को कीमत के अंतर के रूप में लगभग 1.83 करोड़ रुपए का भुगतान भी किया था।

बुनियादी ढांचे और निर्यात को बढ़ावा

आलू की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए, बनास डेयरी ने 2024 में 10,000 टन की क्षमता वाला कोल्ड स्टोरेज भी बनाया था। साथ ही, नवंबर 2025 में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSL) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए थे, जिसका उद्देश्य देशभर के किसानों तक प्रमाणित बीज पहुंचाना है। गौरतलब है कि वर्ष 2025-26 में भारत से लगभग 2.77 लाख टन मूल्य वर्धित आलू उत्पादों का निर्यात हुआ, जिनका मूल्य करीब 2,744.50 करोड़ रुपए था। सणादर प्लांट के विस्तार से इस क्षेत्र में कृषि-आधारित उद्योगों को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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