गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
देश

I-PAC छापेमारी मामला: ममता बनर्जी के खिलाफ CBI जांच हो या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट इस बात पर अपना फैसला सुनाएगा कि क्या राजनीतिक सलाहकार संस्था आई-पैक (I-PAC) के कार्यालय में तलाशी के दौरान कथित हस्तक्षेप के मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के…

I-PAC छापेमारी मामला: ममता बनर्जी के खिलाफ CBI जांच हो या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
(फोटो: IANS)

सुप्रीम कोर्ट इस बात पर अपना फैसला सुनाएगा कि क्या राजनीतिक सलाहकार संस्था आई-पैक (I-PAC) के कार्यालय में तलाशी के दौरान कथित हस्तक्षेप के मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ CBI जांच होनी चाहिए। गुरुवार को सुनवाई पूरी होने के बाद, अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ईडी ने इस मामले में ममता बनर्जी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच CBI को सौंपने की मांग की है।

विज्ञापन

यह पूरा विवाद 8 जनवरी को कोलकाता में आई-पैक के दफ्तर और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर हुई ईडी की छापेमारी से जुड़ा है। यह कार्रवाई कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में की गई थी। ईडी का आरोप है कि तलाशी के दौरान ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं और जांच प्रक्रिया में बाधा डाली।

जांच को लेकर शीर्ष अदालत में तीखी बहस

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और एनवी अंजारिया की पीठ के समक्ष दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर आरोप हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए इसे CBI को सौंपा जाना ज़रूरी है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर फैसला राज्य सरकार पर छोड़ा गया तो पक्षपात के आरोप लग सकते हैं। राजू ने यह भी कहा कि इस विवाद से जुड़े कई क्रॉस-केस हैं, जिनकी जांच एक ही एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए।

वहीं, ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य में अब सरकार बदल चुकी है, इसलिए नई सरकार खुद तय कर सकती है कि जांच CBI को सौंपनी है या नहीं। उन्होंने दलील दी कि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी विशेष आदेश की ज़रूरत नहीं है। इस पर पीठ ने भी सवाल किया कि बदली हुई परिस्थितियों में राज्य सरकार खुद मामला CBI को क्यों नहीं सौंप सकती।

ममता बनर्जी का पक्ष और पिछला आदेश

ममता बनर्जी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वह आई-पैक कार्यालय इसलिए गई थीं ताकि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े गोपनीय डेटा को सुरक्षित किया जा सके, जिसका संबंध पार्टी की चुनावी रणनीति से था। ईडी ने अपनी याचिका में ममता बनर्जी के अलावा तत्कालीन पश्चिम बंगाल पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार वर्मा का भी नाम लिया है।

गौरतलब है कि 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगा दी थी। साथ ही, अदालत ने परिसर से जुड़े CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था।

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →