UCC विधेयक: जमीयत का विरोध बरकरार, कांग्रेस बोली — पहले व्यापक बहस, फिर कानून
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर देश भर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सरगर्मी बढ़ती जा रही है। इस बहस में दो अलग-अलग शहरों से दो अलग-अलग सुर उठे हैं — एक सीधे इनकार का, दूसरा सशर्त स्वीकृति का।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर देश भर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सरगर्मी बढ़ती जा रही है। इस बहस में दो अलग-अलग शहरों से दो अलग-अलग सुर उठे हैं — एक सीधे इनकार का, दूसरा सशर्त स्वीकृति का।
शामली से उठी विरोध की आवाज़
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के शामली में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने यूसीसी के खिलाफ अपना रुख एक बार फिर दृढ़ता से दोहराया। उनका कहना था कि भारत जैसे देश में — जहाँ अलग-अलग धर्म, संस्कृतियाँ और सामाजिक परंपराएँ सदियों से साथ चली आ रही हैं — एक ऐसा कानून जो सबको एक ही तराज़ू पर तौले, व्यावहारिक नहीं हो सकता।
मौलाना कासमी ने स्पष्ट कहा, "मुसलमान शरीयत के बिना नहीं रह सकते।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद पहले भी यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करती रही है और आने वाले समय में भी यह विरोध जारी रहेगा। उनके अनुसार, हर समुदाय की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान होना चाहिए और यूसीसी को एकतरफा तरीके से लागू करने का कोई भी प्रयास उचित नहीं होगा।
मुंबई से कांग्रेस का अलग रुख — विधेयक नहीं, प्रक्रिया पर सवाल
दूसरी तरफ मुंबई में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने यूसीसी विधेयक के विचार को सिरे से नकारने के बजाय उसकी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाया। उनका कहना था कि "यदि सरकार यूसीसी विधेयक लाना चाहती है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन पहले विधेयक की पूरी जानकारी लोगों तक पहुंचनी चाहिए और इस पर व्यापक बहस होनी चाहिए।" समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद किए बिना किसी भी अहम कानून को लागू करना उन्हें स्वीकार्य नहीं।
दलवई ने महिलाओं के अधिकारों के सवाल को केंद्र में रखते हुए कहा कि इस दिशा में कानून बनना स्वागत योग्य है — मुस्लिम समाज में भी महिलाओं को आर्थिक लाभ और कुछ कानूनी अधिकार पहले से दिए गए हैं। परंतु विधेयक में संपत्ति के अधिकार, गुजारा-भत्ता, इद्दत से जुड़े प्रावधान और अन्य सामाजिक पहलुओं को किस रूप में जगह दी गई है — इस पर स्पष्टता आवश्यक है।
बहुविवाह पर रोक — "सही दिशा, पर पूरी राय चाहिए"
बहुविवाह पर प्रतिबंध के प्रस्ताव को दलवई ने सही दिशा में उठाया गया कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि पूरे विधेयक पर समाज के सभी तबकों की राय लेना ज़रूरी है। उनके शब्दों में, व्यापक संवाद और सहमति से तैयार कोई भी कानून ज़्यादा प्रभावी और स्वीकार्य होता है।
यूसीसी पर यह बहस ऐसे वक्त में और तेज हो रही है जब केंद्र सरकार इस विषय पर विधायी कदम उठाने के संकेत दे रही है। जमीयत का स्पष्ट इनकार और कांग्रेस का "पहले संवाद" वाला रुख — दोनों मिलकर यह दर्शाते हैं कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय सहमति अभी एक लंबी राह है।
इनपुट: IANS



