तुर्की: 'परिवार की सुरक्षा' अभियान के तहत LGBTQ+ समुदाय पर देशव्यापी कार्रवाई, 100 से ज़्यादा हिरासत में
तुर्की में सरकार ने ‘माई फैमिली इज सेफ’ (मेरा परिवार सुरक्षित है) नाम से एक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत LGBTQ+ समुदाय के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई की जा रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
तुर्की में सरकार ने ‘माई फैमिली इज सेफ’ (मेरा परिवार सुरक्षित है) नाम से एक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत LGBTQ+ समुदाय के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई की जा रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान में कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों समेत 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में दबाव के चलते बुधवार को रिहा कर दिया गया। सरकार इस कार्रवाई को ‘परिवार और बच्चों की सुरक्षा’ के लिए ज़रूरी बता रही है, जबकि मानवाधिकार संगठन इसे समुदाय के ख़िलाफ़ अब तक की सबसे व्यापक कार्रवाई मान रहे हैं।
यह कार्रवाई रविवार को शुरू हुई और इस्तांबुल, अंकारा, इजमिर, आयदीन तथा मर्सिन जैसे कई शहरों तक फैल गई। अधिकारियों ने LGBTQ+ संगठनों के दफ्तरों, कार्यकर्ताओं के घरों और कुछ अन्य प्रतिष्ठानों पर छापे मारे। न्याय मंत्री अकिन गुरलेक के अनुसार, यह अभियान उन लोगों और जगहों पर केंद्रित था, जिन पर अश्लील सामग्री, वेश्यावृत्ति और बच्चों को ऐसी गतिविधियों से अवगत कराने के आरोप थे। छापेमारी के दौरान डिजिटल उपकरण, नशीले पदार्थ और एक हथियार जब्त करने का भी दावा किया गया है।
मानवाधिकार संगठनों और पत्रकारों पर असर
ह्यूमन राइट्स वॉच समेत कई अधिकार समूहों का कहना है कि सरकार ‘अश्लीलता’ से जुड़े व्यापक कानूनों का इस्तेमाल LGBTQ+ अधिकारों की वकालत करने वालों को निशाना बनाने के लिए कर रही है। यह चिंता तब और बढ़ गई जब प्रमुख दैनिक समाचार पत्र बिरगुन की पत्रकार तुग्बा तेकेरेक को भी गिरफ्तार कर लिया गया। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स के अनुसार, तेकेरेक पर यह कार्रवाई LGBTQ+ समुदाय पर लिखी गई उनकी एक रिपोर्ट के सिलसिले में हुई।
इसके अलावा, मंगलवार को इस्तांबुल में एक अदालत के बाहर हो रहे विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में ले लिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शनकारी ‘एलजीबीटीक्यू+ होना अपराध नहीं है’ जैसे नारे लगा रहे थे, जब पुलिस ने 100 से ज़्यादा लोगों को पकड़ लिया।
कार्रवाई की पृष्ठभूमि और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
हालांकि तुर्की में समलैंगिक संबंध कानूनी तौर पर अपराध नहीं हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकारी नीतियों और बयानों के कारण समुदाय पर दबाव बढ़ा है। इस्तांबुल प्राइड परेड पर 2015 से ही प्रतिबंध लगा हुआ है। मौजूदा कार्रवाई को राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की ‘डिकेड ऑफ द फैमिली एंड पॉपुलेशन’ पहल से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य गिरती जन्मदर जैसी चुनौतियों से निपटना है।
इस कार्रवाई पर यूरोपीय परिषद के मानवाधिकार आयुक्त माइकल ओ'फ्लाहर्टी ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ‘पारिवारिक मूल्यों’ या ‘बच्चों की सुरक्षा’ का हवाला देकर मानवाधिकारों पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। तुर्की के न्याय मंत्रालय ने सभी 81 प्रांतों के अभियोजकों को ‘जेंडरलेसनेस’ को बढ़ावा देने वाली सामग्री की शिकायतों की जांच करने का निर्देश दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि यह कार्रवाई जारी रह सकती है।
इनपुट: IANS



