भारतीय रेल व्यवस्था में तीन बड़े बदलाव ।

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रेल से ज्यादा सफर करने वाले यात्रियों के लिए सरकार की ओर से खुशखबरी है, क्योंकि भारतीय रेल व्यवस्था में तीन बड़े बदलाव होने जा रहे है जिनके चलते यात्रियों को हो रही परेशानी का अंत हो जायेगा।

  • पहला बदलाव

शताब्दी में नया मेन्यू
रेल मंत्रालय ने ट्रेनों में खानपान सेवा सुधारने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए है । इसके तहत शताब्दी ट्रेनों में अगले हफ्ते से नया मेन्यू शुरू किया जा रहा है।

 अलग-अलग जायका
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस राज्य के लिए शताब्दी ट्रेन चल रही है, वहां का क्षेत्रीय व्यंजन यात्रियों को दिया जाएगा। कोशिश होगी कि हफ्ते में सातों दिन यात्रियों को अलग-अलग भोजन परोसा जाए।

ब्रांडेड का भी विकल्प
वर्तमान में शताब्दी ट्रेनों में एक ही प्रकार का वेज-नॉन वेज दिया जाता है। नए मेन्यू में देश के पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण हिस्से में जाने वाली शताब्दी ट्रेनों में वहां का स्थानीय भोजन दिया जाएगा। ब्रांडेड वेज-नॉनवेज खाने का भी विकल्प मौजूद होगा।

जल्द होगा दरों का फैसला
नए मेन्यू में खाने की दरों में परिवर्तन किया गया है, जिसपर अंतिम फैसला सोमवार को रेलवे बोर्ड के सदस्य महोम्मद जमशेद से मंजूरी मिलने के बाद किया जाएगा। खाने की दरें राउंड फिगर में होंगी। इससे यात्रियों से वेंडर ओवर चार्ज नहीं कर पायंगे । साथ ही थाली के वेंडर थाली के अलावा फूटकर खाना नहीं बेच सकेंगे। 31 अगस्त तक राजधानी ट्रेनों के खानपान की जिम्मेदारी आईआरसीटीसी को दे दी जायेगी।

  • दूसरा बदलाव
    राजधानी, शताब्दी और दुरंतो एक्सप्रेस में खानपान की सेवा लेने की अनिवार्यता एक अगस्त से समाप्त कर दी जायेगी। वहीं, गतिमान एक्सप्रेस में पहले की तरह खाने का शुक्ल टिकट के साथ ही कटेगा। रेलवे के नए नियम के अनुसार अगर कोई यात्री खाना नहीं लेना चाहता है तो उसका किराया कम हो जायेगा। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर योजना चल रही है। बताया जा रहा है कि कैटरिंग सुविधा नहीं लेने पर यात्रियों को 250 रूपये तक का लाभ मिल सकता है

 

  • तीसरा बदलाव
    ट्रेनों में बदबूदार कंबल गुजरे समय की बात हो जाएगी। रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि कंबलों को एक माह कि जगह 15 दिन और एक सप्ताह में धोने का काम शुरू किया जा रहा है। कुछ खंडो में कंबलों के कवर बदलने का काम शुरू कर दिया गया है।
    फिलहाल कंबलों को हर एक या दो महीने के भीतर धोने के निर्देश है। लेकिन हाल ही में जारी कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कुछ कंबल छह महीने तक नहीं धुले थे।

हल्के कंबल मिलेंगे
भारतीय रेलवे ने इसके लिए एक कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत कंबल नियमित तौर पर धुल जायँगे। साथ ही डिज़ाइन एवं हल्के कंबल उपलबध कराये जायँगे।

निफ्ट को सौंपा जिम्मा
रेलवे ने राष्ट्रीय फैशन डिज़ाइन संस्थान को कम ऊन वाले हल्के कंबल बनाने का कम सौंपा है। पतले, सामान्य पानी से धुलने लायक कंबलों का परीक्षण भी मध्य रेलवे जोन में पायलट परियोजना के तौर पर किया जा रहा है।

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