शनिवार, 8 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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तमिलनाडु में शराब पर लगेगा 20 रुपये तक का नया उपकर, जानिए सरकार ने क्यों लिया यह फैसला

तमिलनाडु में शराब खरीदने वालों को अब हर बोतल या कंटेनर पर 20 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं। राज्य सरकार ने शराब पर एक नया 'पर्यावरण एवं सामाजिक कल्याण उपकर' (सेस) लगाने का फैसला किया है…

तमिलनाडु में शराब पर लगेगा 20 रुपये तक का नया उपकर, जानिए सरकार ने क्यों लिया यह फैसला
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में शराब खरीदने वालों को अब हर बोतल या कंटेनर पर 20 रुपये तक अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं। राज्य सरकार ने शराब पर एक नया 'पर्यावरण एवं सामाजिक कल्याण उपकर' (सेस) लगाने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य शराब के खाली कंटेनरों से होने वाले प्रदूषण को रोकना और नशे की लत से प्रभावित परिवारों की मदद करना है।

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यह प्रस्ताव 'तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2024' का हिस्सा है, जिसे वाणिज्यिक कर और पंजीकरण मंत्री डी. लोकेश तमिलसेल्वन ने विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक के माध्यम से मौजूदा 'तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2006' में एक नई धारा 3-ए जोड़ी जाएगी। यह सरकार को शराब पर लगने वाले मौजूदा वैट (VAT) के अलावा यह विशेष उपकर लगाने का अधिकार देगी।

इस उपकर का उद्देश्य क्या है?

सरकार ने इस नए उपकर के पीछे कई अहम कारण बताए हैं। इसका मुख्य लक्ष्य फेंकी गई शराब की बोतलों और अन्य पैकेजिंग सामग्री, जैसे कांच और प्लास्टिक, से पर्यावरण पर पड़ रहे बुरे प्रभावों को कम करना है। ये फेंके गए कंटेनर न केवल प्रदूषण फैलाते हैं, बल्कि जंगलों और वन्यजीवों के लिए भी खतरा बनते हैं।

इस उपकर से जमा होने वाले राजस्व को एक विशेष फंड में रखा जाएगा। इस फंड का इस्तेमाल कई कल्याणकारी योजनाओं के लिए होगा, जिनमें शामिल हैं:

  • शराब के कंटेनरों की रीसाइक्लिंग और सुरक्षित निपटान।
  • नशामुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
  • शराब की लत से प्रभावित परिवारों को आजीविका में सहायता प्रदान करना।
  • पर्यावरण, जंगल और वन्यजीवों के आवासों का संरक्षण।
  • शराब के दुष्प्रभावों के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाना।

कानून के मुख्य प्रावधान

विधेयक के अनुसार, सरकार शराब के प्रकार, मात्रा और पैकेजिंग के आधार पर अधिसूचना जारी कर उपकर की राशि तय कर सकेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 20 रुपये प्रति यूनिट कंटेनर होगी। कानून में 'यूनिट कंटेनर' को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिसमें बोतल, जार, फ्लास्क, टिन, कैन और टेट्रा पैक जैसी सभी तरह की पैकेजिंग शामिल है। यह भी साफ किया गया है कि ग्राहकों से वसूला गया यह उपकर डीलर के टैक्स योग्य टर्नओवर का हिस्सा नहीं माना जाएगा। विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार द्वारा अधिसूचित तारीख से यह नया कानून लागू होगा।

इनपुट: IANS

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