शनिवार, 29 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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नेपाल में बाढ़: सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत और चीन से विशेषज्ञ दल बुलाए गए

नेपाल ने स्पष्ट किया है कि उसने अंतरराष्ट्रीय बचाव सहायता के प्रस्तावों को अस्वीकार नहीं किया है, बल्कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को बचाने के लिए विशेष तकनीकी मदद मांगी है। समाचार एजेंसी…

नेपाल में बाढ़: सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत और चीन से विशेषज्ञ दल बुलाए गए
(फोटो: IANS)

नेपाल ने स्पष्ट किया है कि उसने अंतरराष्ट्रीय बचाव सहायता के प्रस्तावों को अस्वीकार नहीं किया है, बल्कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को बचाने के लिए विशेष तकनीकी मदद मांगी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इसी क्रम में भोटेकोशी में बाढ़ के कारण बंद हुई सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत और चीन से विशेषज्ञ दलों को बुलाया गया है।

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शनिवार को काठमांडू में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री शिशिर खनल ने उन खबरों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि नेपाल विदेशी बचाव दलों को वापस भेज रहा है। उन्होंने कहा कि बचाव कार्यों को और प्रभावी बनाने के लिए पड़ोसी देशों से विशेष सहायता मांगी गई है।

भारत और चीन से विशेष मदद

विदेश मंत्री खनल ने जानकारी दी, "भोटेकोशी में बाढ़ के कारण बंद हुई सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने के लिए एक्सपर्ट की मदद मांगी गई है। सुरंग से बचाव कार्य के लिए भारत से 11 सदस्यों वाली एक्सपर्ट टेक्निकल टीम को भेजा गया है।" यह भारतीय टीम शुक्रवार को काठमांडू पहुंच चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि चीन से भी एक विशेषज्ञ दल के जल्द ही नेपाल पहुंचने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, "हमारी सुरक्षा एजेंसियां ​​और बचाव टीमें बचाव अभियान को अच्छे से चला रही हैं। इसे और बेहतर बनाने के लिए हमने जरूरी क्षेत्रों में अपने पड़ोसियों से एक्सपर्ट की मदद मांगी है।" सरकार ने सुरंगें खोलने के अलावा, आपदाग्रस्त क्षेत्रों में जीवित बचे लोगों का पता लगाने, फोरेंसिक जांच, डीएनए टेस्ट और शवों के संरक्षण जैसी तकनीकी जरूरतों के लिए मित्र राष्ट्रों से सहायता का अनुरोध किया है।

बचाव कार्य में भौगोलिक चुनौतियां

आपदा के कारण दो जिले मुख्य सड़कों और पुलों के नष्ट हो जाने से देश के बाकी हिस्सों से लगभग कट गए हैं। इन इलाकों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर ही मुख्य साधन रह गए हैं। विदेश मंत्री ने कहा, "नेपाल के ऊबड़-खाबड़ इलाके, संकरी घाटियां और अनिश्चित मौसम बड़े हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल को सीमित करते हैं और भारी उपकरण पहुंचाना मुश्किल बनाते हैं।" इन्हीं चुनौतियों के कारण देश की सुरक्षा एजेंसियों को विशेष अनुभव वाले विदेशी विशेषज्ञों की आवश्यकता महसूस हुई।

इस बीच, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा शनिवार शाम 4 बजे तक जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 675 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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