गुरूवार, 18 जून 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

सांसदों के वेतन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त केंद्र सरकार से एक हफ्ते में मांगा जवाब

एक बार फिर से सांसदों के वेतन/भत्ते को लेकर चर्चा हो रही है. सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को सरकार को मौजूदा सांसदों के वेतन, भत्ते के लिए स्थायी तंत्र गठित…

सांसदों के वेतन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त केंद्र सरकार से एक हफ्ते में मांगा जवाब
एक बार फिर से सांसदों के वेतन/भत्ते को लेकर चर्चा हो रही है. सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को सरकार को मौजूदा सांसदों के वेतन, भत्ते के लिए स्थायी तंत्र गठित करने के लिए अपना पक्ष स्पष्ट करने का ‘अंतिम अवसर’ दिया है. न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने केन्द्र सरकार की तरफ इशारा करते हुये कहा कि “आपने अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया है. आपकी ओर से सितंबर 2017 में पेश किए गए शपथपत्र में स्थायी तंत्र स्पष्ट नहीं है.” गौरतलब है कि गैर सरकारी संगठन लोक प्रहरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पूर्व सांसदों को आजीवन पेंशन भत्ते व अन्य सुविधाएं दिये जाने पर सवाल उठाए हैं. मंगलवार को सुनवाई शुरू हुई तो कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा. सरकारी वकील ने एक सप्ताह का वक्त मांगा ताकि पूरी जानकारी दी जा सके. हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से इसका विरोध किया गया था. न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कहा कि इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा 12 सितम्बर 2017 को दाखिल शपथपत्र से सरकार का पक्ष स्पष्ट नहीं होता है. केंद्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अजीत सिन्हा ने पीठ से कहा, “यह मामला केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है.” न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने इस पर सिंह को कहा, भारत सरकार की नीति गतिशील (डायनेमिक) है. हालांकि आप इसे प्रत्येक दिन बदल नहीं सकते. गैर ज़रूरी सुविधाओं पर सवाल बता दें कि केन्द्र सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुये न्यायालय ने सिन्हा से कहा, “आपके पास हो सकता है अंतिम शब्द न हो, लेकिन आपके पक्ष को स्पष्ट करने के लिए अब आपके पास अंतिम अवसर है.” न्यायालय इस मामले में एक एनजीओ लोक प्रहरी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें सांसदों के वेतन व भत्ते को तय करने के लिए एक स्थायी तंत्र गठित करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि सांसद इस पर खुद निर्णय नहीं कर सकते.  याचिका में यह भी मांग की गई है कि पूर्व सांसदों को पेंशन और अन्य सुविधाएं नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि वे लोगों का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार खो चुके होते हैं. मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च को होगी.
Shubhrangi

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शुभरंगी News4Social की संवाददाता हैं। वे राष्ट्रीय और राजनीतिक खबरों पर लिखती हैं, और मुद्दों को संतुलित व तथ्यपरक नज़रिये से पाठकों तक पहुँचाती हैं। सभी लेख देखें →

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