आपूर्ति विभाग में एक महीने के अंदर हुआ था 68 लाख का घोटाला

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आपूर्ति विभाग ने सौंपा पुलिस की दुकानों को ब्योरा, जांच में हुआ खुलासा, पांच पूर्ति निरीक्षकों के खिलाफ गिरफ्तारी की अनुमति मांगी गई, आपूर्ति विभाग की ओर से इंकार शहर के 46 कोटेदार जुलाई में करीब 68 लाख रुपए का राशन हड़प गए थे। आपूर्ति विभाग ने पुलिस को दुकानों का ब्योरा सौंपा तब इसका खुलासा हुआ। अब आशंका जताई जा रही है कि आधार कार्ड से राशन वितरण की शुरुआत होने के बाद कई बार यह खेल हुआ होगा।

अगस्त में नेशनल इनफार्मेशन सेंटर (एनआइसी) की जांच में खाद्यान्न घोटाला सामने आया था। सितंबर में शासन के निर्देश पर राजधानी के विभिन्न थानों में 46 कोटेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस ने इन सभी कोटेदारों द्वारा की गई अनियमितता के बाबत अपूर्ति विभाग से जानकारी मांगी थी। आपूर्ति विभाग ने यह डाटा उपलब्ध कराया। इसमें पता चला है कि जुलाई में कोटेदारों ने करीब 8200 राशनकार्डों का गलत इस्तेमाल कर गेहूं व चावल का दुरुपयोग किया। इसकी कीमत करीब 87 लाख रुपए से अधिक की आंकी गई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अगर पिछले महीनों में वितरित हुए खाद्यान्न की भी जांच कराई जाए तो घोटाले की रकम इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। आपूर्ति विभाग के सूत्रों का दावा है कि पुलिस ने जांच में पुख्ता सबूत मिलने के बाद राजधानी के करीब पांच पूर्ति निरीक्षकों के खिलाफ  गिरफ्तारी की अनुमति मांगी थी लेकिन आपूर्ति विभाग की ओर से अब तक यह अनुमति नहीं दी गई है। लिहाजा अब जिला प्रशासन को पत्र भेजा जाएगा।

कोटेदारों पर कौन मेहरबान

गरीबों के राशन का घोटाला करने वाले कोटेदारों पर आपूर्ति विभाग के अलावा पुलिस भी मेहरबान है। मामले में दो महीने बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी तक नहीं हो सकी है। पुलिस जहां मुकदमे की धाराओं में गिरफ्तारी का प्रावधान न होने की बात कह रही है, वहीं कानूनी जानकार उन धाराओं में आजीवन कारावास तक का प्रावधान बता रहे हैं। ऐसे में साफ  है कि कहीं न कहीं आपूर्ति विभाग के साथ पुलिस भी आरोपियों को बचाने में जुटी हुई है। फिलहाल मुकदमा दर्ज कराने के बाद पूर्ति विभाग ने तो इस मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया है। अब बारी है पुलिस द्वारा कार्रवाई करने की, लेकिन पुलिस तो घोटालेबाजों पर मेहरबान है। इसीलिए अब तक एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

इन धाराओं में हुआ था मुकदमा

राशन घोटाले में आरोपियों पर आईपीसी की धारा 467, 468, 471, 420 व आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा तीन और सात में मुकदमा हुआ था। विभाग के जिममेदारों का कहना है कि धारा 467 व 471 में दस साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसमें गिरफ्तारी का भी प्रावधान है। जबकि धारा 420 व 468 में सात साल तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान है।

पूर्ति विभाग के दो ऑपरेटर थे शामिल

राशन घोटाले की पूरी साजिश जिला पूर्ति व क्षेत्रीय पूर्ति अधिकारी कार्यालय में ही रची गई थी। क्यों कि यहां आधार फीडिंग के लिए तैनात ऑपरेटरों ने ही फर्जी आधार राशन कार्डों से लिंक किए थे।

46 कोटेदारों पर केस

अनाज घोटाले में राजधानी के 46 उचित दर विक्रेताओं कोटेदार पर आपूर्ति विभाग के अफसरों ने केस दर्ज कराया था और दुकानें निरस्त कर दी थी। इन कोटेदारों ने राशन कार्ड में पहले से लगे आधार को हटाकर नया आधार ङ्क्षलक किया फिर पीओएस मशीन में अंगूठा लगाने पर ही राशन की पर्ची निकलती है। इसके बाद फिर से राशन कार्ड से उस आधार को हटाकर पुराना आधार कार्ड लिंक कर दिया गया। यही प्रक्रिया अगले कार्ड से राशन निकालने के लिए दोहराई गई। ये प्रक्रिया एक ही आधार से कराई गई। इस पूरी प्रक्रिया में एक्सपर्ट को भी चार से पांच मिनट तो लगते हैं। लेकिन राशन घोटाले की परीक्षण रिपोर्ट में ये प्रक्रिया एक मिनट में ही पूरी कर ली गई।

एक नजर

1246 कोटेदार हैं डिस्ट्रिक्ट में

700 उचित दर विक्रेता हैं शहर में

05 किलो प्रति यूनिट अनाज मिलता है पात्र कार्डधारक को

35 किलो प्रति यूनिट अनाज मिलता है अंत्योदय कार्डधारक को

6 लाख 50 हजार पात्र ग्रहस्थी के राशन कार्ड धारक हैं.

कोट- अब इस पूरे मामले की जांच पुलिस अैर एसटीएफ कर रही हैं। जांच के बाद कार्रवाई भी शासन स्तर पर होनी है। फिलहाल नई व्यवस्था शुरू होने पर कोटेदार ई-पॉश मशीनों से छेड़छाड़ नहीं कर पाएंगे। इसके लिए आरएफआईडी के जरिए मशीनों की जियोग्राफिकल बाउंड्री तय करने का काम जल्द शुरू होगा। जिससे वितरण में होने वाली गड़बड़ी पर रोक लगेगी। मो. आमिर, डीएसओ