दिल्ली मतदाता सूची: 'आप' ने चुनाव आयोग के सामने वास्तविक वोटरों के नाम कटने की आशंका जताई
दिल्ली में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर आम आदमी पार्टी (आप) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आशंका जताई है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में…
दिल्ली में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर आम आदमी पार्टी (आप) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आशंका जताई है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में असली मतदाताओं के नाम 'शिफ्टेड' (स्थानांतरित) बताकर सूची से हटाए जा सकते हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर 'आप' के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से मुलाकात की।
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व वाले इस प्रतिनिधिमंडल में विधायक संजीव झा और कुलदीप कुमार समेत कई अन्य नेता शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि खासकर अनधिकृत कॉलोनियों, गांवों और झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में कई लोगों तक एन्यूमरेशन फॉर्म पहुंचे ही नहीं हैं, जबकि कुछ जगहों पर कागजों में 100% वितरण दिखाया जा रहा है।
आप की मुख्य चिंताएं और आरोप
बैठक के बाद सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि पार्टी के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) और स्थानीय लोगों से मिले फीडबैक के मुताबिक, लगभग 60 फीसदी लोगों को बिना उचित सत्यापन के 'शिफ्टेड' श्रेणी में डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और हरियाणा से आए बहुत से लोग किराए पर रहते हैं और अक्सर एक ही इलाके में घर बदलते हैं। सिर्फ मकान बदलने के आधार पर किसी का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
कोंडली के विधायक कुलदीप कुमार ने आरोप लगाया कि कई बीएलओ ने फॉर्म वितरण के आंकड़ों में जमीनी हकीकत से अलग जानकारी दर्ज की है। उन्होंने कहा कि घुमंतू समुदाय, अनुसूचित जाति और लगातार ठिकाना बदलने वाले कई परिवारों तक भी फॉर्म नहीं पहुंच सके हैं। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि SIR से पहले की प्रक्रिया में भी करीब 10 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, और अगर उन तक अब फॉर्म नहीं पहुंचा तो उनके मताधिकार का क्या होगा।
चुनाव आयोग से प्रमुख मांगें और सुझाव
आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग के सामने कई मांगें रखी हैं। सौरभ भारद्वाज ने मांग की कि जिन भी मतदाताओं को 'शिफ्टेड' के रूप में चिह्नित किया गया है, उनकी सूची नाम, पते और मोबाइल नंबर के साथ सभी राजनीतिक दलों को दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे पार्टियां खुद यह सत्यापित कर सकेंगी कि वे लोग वास्तव में वहां से जा चुके हैं या अभी भी वहीं रह रहे हैं।
भारद्वाज ने यह भी सुझाव दिया कि चुनाव आयोग ऐसे मतदाताओं को एसएमएस के जरिए सूचित कर सकता है, हालांकि उनके अनुसार आयोग ने इसे व्यावहारिक रूप से कठिन बताया। वहीं, बुराड़ी के विधायक संजीव झा ने कहा कि अगर किसी मतदाता को गलती से 'शिफ्टेड' दिखा दिया गया है और वह खुद उपस्थित होकर अपनी पहचान साबित करता है, तो उसका नाम दोबारा शामिल करने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस सुझाव पर चुनाव आयोग ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए विचार करने का आश्वासन दिया है।
इनपुट: IANS



