सोमवार, 17 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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महाराष्ट्र: सिंधुदुर्ग में बनेगी 150 करोड़ की इलेक्ट्रिक बोट फैक्ट्री, मुंबई वॉटर मेट्रो को मिलेगी नई ताकत

महाराष्ट्र के समुद्री परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के सिंधुदुर्ग जिले में 150 करोड़ रुपये के निवेश से एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बोट निर्माण इकाई

महाराष्ट्र: सिंधुदुर्ग में बनेगी 150 करोड़ की इलेक्ट्रिक बोट फैक्ट्री, मुंबई वॉटर मेट्रो को मिलेगी नई ताकत
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र के समुद्री परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के सिंधुदुर्ग जिले में 150 करोड़ रुपये के निवेश से एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बोट निर्माण इकाई स्थापित करने की तैयारी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस परियोजना के लिए महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और एम. ज़ोया मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

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इस समझौते का मुख्य उद्देश्य मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना के लिए आधुनिक इलेक्ट्रिक नौकाएं उपलब्ध कराना और सिंधुदुर्ग में जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) सुविधाओं को विकसित करना है। यह पहल महाराष्ट्र में समुद्री परिवहन को तकनीक-आधारित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।

रोजगार और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा

सिंधुदुर्ग के संरक्षक मंत्री और राज्य के मत्स्य एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए। उन्होंने विश्वास जताया कि इस परियोजना से सिंधुदुर्ग और आसपास के इलाकों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकार इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग देगी, जिससे राज्य में आधुनिक शिपबिल्डिंग उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार महाराष्ट्र के समुद्री क्षेत्र में बड़े निवेश को प्रोत्साहित कर रही है। उनके अनुसार, यह परियोजना राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई गति देगी और परिवहन को अधिक सुरक्षित बनाएगी।

परियोजना की मुख्य बातें

समझौते के तहत, यह नई फैक्ट्री सिंधुदुर्ग जिले के सावंतवाड़ी तालुका स्थित तलवणे गांव में लगभग 22 एकड़ भूमि पर स्थापित की जाएगी। इस इकाई में नई तकनीक से लैस इलेक्ट्रिक नौकाओं का निर्माण होगा, जिससे राज्य में हरित समुद्री परिवहन (Green Maritime Transport) को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एमओयू पर हस्ताक्षर के दौरान परिवहन एवं बंदरगाह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय सेठी और एम. ज़ोया मरीन सर्विसेज के निदेशक जॉन फर्नांडिस, सूरज देवाढिया और डॉ. नीलेश बनावलीकर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इनपुट: IANS

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