मौलाना साजिद रशीदी ने कृष्ण पर बयान को बताया गलत, जौहर यूनिवर्सिटी और 'वंदे मातरम' बिल पर भी रखी राय
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद साजिद रशीदी ने कई मौजूदा विवादों पर अपनी राय जाहिर की है। उन्होंने भगवान कृष्ण पर एक अन्य मौलाना की टिप्पणी को गलत बताते हुए दूसरों की धार्मिक…
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद साजिद रशीदी ने कई मौजूदा विवादों पर अपनी राय जाहिर की है। उन्होंने भगवान कृष्ण पर एक अन्य मौलाना की टिप्पणी को गलत बताते हुए दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का विरोध किया है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई और 'वंदे मातरम' पर केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिल को लेकर भी अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।
भगवान कृष्ण पर टिप्पणी अस्वीकार्य
मौलाना जरजिस अंसारी के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने भगवान कृष्ण को मुसलमान बताया था, साजिद रशीदी ने स्पष्ट रूप से असहमति जताई। उन्होंने कहा, "मैंने कहा है कि यह बयान गलत है। किसी को भी दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए।" रशीदी ने आगे कहा कि मुसलमानों का यह विश्वास है कि दुनिया में करीब 1,24,000 पैगंबर आए, लेकिन यह कहना कि कोई विशेष व्यक्ति नमाज़ पढ़ता था, "मेरी नजर में ऐसी बात है जिससे किसी की आस्था को ठेस पहुंच सकती है।" उन्होंने कहा कि जब देश में हिंदू-मुस्लिम नफरत चरम पर है, तो ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।
'वंदे मातरम' बिल और जौहर यूनिवर्सिटी का विरोध
मानसून सत्र में 'वंदे मातरम' के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने वाले संभावित बिल पर रशीदी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि जो सरकारें धर्म या आस्था से जुड़े मामलों पर ऐसे बिल लाती हैं, उनके पास करने के लिए और कुछ नहीं होता।" उन्होंने सरकारों को महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे असली मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह दी। रशीदी ने इसे "मुसलमानों को परेशान करने की जानबूझकर की गई कोशिश" और उन्हें निशाना बनाने का प्रयास बताया।
इसी तरह, उत्तर प्रदेश की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी शिक्षा का केंद्र है, जहाँ सभी धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं और इस पर बुलडोजर चलाना उनके भविष्य से खिलवाड़ है। रशीदी ने कहा, "अगर जौहर यूनिवर्सिटी सरकारी जमीन पर बनी है तो भी डीएम इसे अपने संरक्षण में लेकर चलाएं। यूनिवर्सिटी को नहीं तोड़ना चाहिए, इसके खिलाफ मुसलमानों को एकजुट होकर खड़े होने की जरूरत है।"
इनपुट: IANS



