शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
दुनिया

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में दो ईसाई युवकों की हत्या, नाराज़ समुदाय ने शवों के साथ हाईवे जाम किया

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में दो ईसाई युवकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद स्थानीय समुदाय में गहरा दुख और आक्रोश फैल गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना के विरोध में…

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में दो ईसाई युवकों की हत्या, नाराज़ समुदाय ने शवों के साथ हाईवे जाम किया
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में दो ईसाई युवकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद स्थानीय समुदाय में गहरा दुख और आक्रोश फैल गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना के विरोध में नाराज़ लोगों ने पीड़ितों के शवों को एम्बुलेंस में रखकर व्यस्त क्वेटा-कराची हाईवे को कई घंटों तक जाम कर दिया।

विज्ञापन

यह वारदात शुक्रवार को मस्तुंग ज़िले के शमसाबाद इलाके में हुई। 21 वर्षीय आयुष मसीह और 24 वर्षीय डोमनिक मसीह अपने कुछ दोस्तों के साथ शाम को क्रिकेट खेल रहे थे। तभी मोटरसाइकिल पर सवार हमलावर वहां पहुंचे और दोनों को गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह स्थान ईसाई बस्ती से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है।

हत्याकांड और विरोध प्रदर्शन

अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन 'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (वीओपीएम) ने बताया कि इस दोहरी हत्या ने स्थानीय ईसाई समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। संगठन के अनुसार, शोक मनाने के लिए इकट्ठा हुए परिवार और दोस्तों ने खुद को बेबस और डरा हुआ महसूस किया। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें क्यों निशाना बनाया जा रहा है और उनकी सुरक्षा करने वाला कोई क्यों नहीं है।

संगठन ने रिपोर्टों का हवाला देते हुए इस हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) का हाथ होने की आशंका जताई है। आईएसकेपी, इस्लामिक स्टेट का स्थानीय सहयोगी संगठन है, जो बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में सक्रिय है और पहले भी अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले करता रहा है।

अल्पसंख्यकों पर हिंसा का पैटर्न

वीओपीएम ने इस घटना को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा की एक और कड़ी बताया है। संगठन के मुताबिक, सिर्फ बलूचिस्तान में ही पिछले एक दशक में कम से कम 18 ईसाइयों की हत्या हो चुकी है। इनमें से कुछ चर्च पर हुए बम धमाकों में मारे गए, जबकि अन्य को उनके धर्म या जातीय पहचान के कारण निशाना बनाया गया।

संगठन ने यह भी कहा कि बलूचिस्तान के अलावा पूरे पाकिस्तान में ईसाई समुदाय को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें झूठे ईशनिंदा के आरोप, भीड़ की हिंसा और लगातार होने वाला भेदभाव प्रमुख हैं। वीओपीएम ने कराची और पंजाब की हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये दिखाती हैं कि कैसे तनाव तेज़ी से घरों और परिवारों पर हमलों में बदल सकता है।

इनपुट: IANS

N

News4Social इंटरनेशनल डेस्क

News4Social इंटरनेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →