सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' गाने की अनिवार्यता पर शशि थरूर ने उठाए सवाल, व्यावहारिक दिक्कतों का दिया हवाला
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पर चिंता व्यक्त की है, जिसे राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई है। इस नए संशोधन के तहत अब किसी भी सरकारी कार्यक्रम की…
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पर चिंता व्यक्त की है, जिसे राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई है। इस नए संशोधन के तहत अब किसी भी सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रगान के साथ-साथ पूरे राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को गाना अनिवार्य कर दिया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, थरूर ने इस नियम की व्यावहारिकता को लेकर सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए थरूर ने लिखा कि वह राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन इस नए नियम से जुड़ी कुछ व्यावहारिक परेशानियाँ हैं। उन्होंने बताया, "जन गण मन के दौरान दर्शकों से उम्मीद की जाती है कि वे सम्मान के साथ खड़े हों और पूरे 52 सेकंड तक अपना ध्यान इस पर केंद्रित रखें। राष्ट्रगीत को पूरा गाने में 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगता है।"
समय और सम्मान से जुड़ी चिंता
थरूर ने तमिलनाडु के हालिया फैसले का भी जिक्र किया, जिसके तहत इन दोनों से पहले राज्य गीत भी गाया जाएगा। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु ने हाल ही में फैसला किया है कि इन दोनों से पहले तमिल भाषा में राज्य गीत गाया जाएगा, जिसमें 2 मिनट और लगेंगे। क्या हम सच में उम्मीद करते हैं कि दर्शक हर कार्यक्रम से पहले और बाद में छह मिनट तक (यानी कुल 12 अतिरिक्त मिनट) सम्मान के साथ और बिना हिले-डुले खड़े रहेंगे?"
कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाया कि क्या सम्मान और धैर्य को कानून के माध्यम से लागू किया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इस कदम का उल्टा असर भी हो सकता है। थरूर ने कहा, "मुझे डर है कि राष्ट्रीय गीत के प्रति ज्यादा सम्मान बढ़ाने का जो मकसद इस बिल का है, वह पूरा नहीं होगा बल्कि इसका उलटा भी हो सकता है।"
क्या है नया संशोधन?
यह संशोधन 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' के तहत भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और इसे राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' के बराबर का दर्जा देता है। संसद द्वारा पारित होने के बाद अब इसे राष्ट्रपति की भी मंजूरी मिल चुकी है।
इनपुट: IANS



