लंबी और सेहतमंद ज़िंदगी का राज़: नई स्टडी के अनुसार सांस्कृतिक गतिविधियां उम्र बढ़ने की रफ़्तार धीमी कर सकती हैं
अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोग अपनी उम्र से ज़्यादा जवान और फुर्तीले दिखते हैं, जबकि कुछ पर उम्र का असर जल्दी नज़र आने लगता है। अब एक नई रिसर्च इस पहेली को सुलझाने में मदद कर सकती है। समाचार एजेंसी…
अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोग अपनी उम्र से ज़्यादा जवान और फुर्तीले दिखते हैं, जबकि कुछ पर उम्र का असर जल्दी नज़र आने लगता है। अब एक नई रिसर्च इस पहेली को सुलझाने में मदद कर सकती है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जो लोग सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं, उनके शरीर की उम्र बढ़ने की रफ़्तार धीमी हो सकती है। आसान शब्दों में कहें तो सिनेमा, म्यूज़ियम या थिएटर जाने जैसी आदतें आपको शारीरिक रूप से लंबे समय तक जवान बनाए रखने में मददगार हो सकती हैं।
यह अध्ययन 'जर्नल ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्युनिटी हेल्थ' में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ है। जापान के इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस टोक्यो के शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि क्या सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल होने का शरीर की जैविक उम्र (Physiological Age) से कोई संबंध है।
कैसे किया गया यह अध्ययन?
इस रिसर्च के लिए इंग्लैंड में चल रहे 'इंग्लिश लॉन्गिट्यूडिनल स्टडी ऑफ़ एजिंग' के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें 50 साल या उससे ज़्यादा उम्र के कुल 1,899 लोगों के स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े डेटा को शामिल किया गया, जो 2004 से 2009 के बीच इकट्ठा किया गया था। वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों की शारीरिक उम्र का पता लगाने के लिए 10 अहम पैमाने तय किए, जिनमें ब्लड प्रेशर, फेफड़ों की क्षमता, कोलेस्ट्रॉल, हीमोग्लोबिन स्तर, बॉडी मास इंडेक्स (BMI), हाथों की पकड़ और चलने की गति जैसी चीजें शामिल थीं।
इसके साथ ही, लोगों से पूछा गया कि वे कितनी बार सिनेमा, म्यूज़ियम, आर्ट गैलरी, थिएटर या कॉन्सर्ट जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। इसी जानकारी के आधार पर उनका 'सांस्कृतिक जुड़ाव स्कोर' तैयार किया गया।
रिसर्च के चौंकाने वाले नतीजे
विश्लेषण में एक दिलचस्प पैटर्न सामने आया। जिन लोगों का सांस्कृतिक जुड़ाव स्कोर ज़्यादा था, उनकी औसत शारीरिक उम्र 66.9 साल पाई गई। वहीं, सांस्कृतिक गतिविधियों से दूर रहने वाले लोगों की औसत शारीरिक उम्र लगभग 69.9 साल निकली। यानी दोनों समूहों के बीच करीब तीन साल का स्पष्ट अंतर था।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि सांस्कृतिक जुड़ाव स्कोर में हर एक पॉइंट की बढ़ोतरी, शरीर की उम्र में लगभग 31 दिन की कमी के बराबर थी। यह संबंध व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, नौकरी, आय या पुरानी बीमारियों जैसे कारकों को हटाने के बाद भी कायम रहा।
सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, सेहत के लिए भी ज़रूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि सांस्कृतिक गतिविधियां लोगों के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं। ऐसे आयोजनों में शामिल होने से सामाजिक रिश्ते मजबूत होते हैं, अकेलापन और तनाव घटता है, जो सीधे तौर पर शारीरिक स्वास्थ्य को फायदा पहुंचाता है।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी साफ़ किया है कि यह अध्ययन केवल एक संबंध दर्शाता है, यह सीधे तौर पर साबित नहीं करता कि ऐसी गतिविधियां ही उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करती हैं। यह भी संभव है कि जो लोग पहले से स्वस्थ महसूस करते हैं, वे ही इनमें ज़्यादा हिस्सा लेते हों। इसके बावजूद, शोधकर्ताओं का कहना है कि सांस्कृतिक जुड़ाव एक अच्छी आदत है, जिसे बढ़ाया जा सकता है और इसका असर नियमित व्यायाम जितना ही महत्वपूर्ण हो सकता है।
इनपुट: IANS



