जानिए क्यों राम मंदिर मामले को लेकर साधू-संतों ने बुलाई आपात बैठक

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नई दिल्ली: राम मंदिर निर्माण का मुद्दा आज कल काफी चर्चाओं का विषय बना हुआ है. इसके लिए शिवसेना और वीएचपी दोनों सरकार पर अपने तरीके से दवाब बन चुका है.

बता दें कि अखाड़ों के साधू-संतों ने 4-5 दिसंबर को अयोध्या कूच करने को फैसला किया था. इस पर अयोध्या प्रशासन ने संतों को इस कूच की अनुमति देने से साफ रूप से इंकार कर दिया था. प्रशासन द्वारा साधुओं को किसी भी आयोजन के लिए मंजूरी नहीं दी गई है. अयोध्या प्रशासन से मंजूरी न मिलने के बाद अखाड़ा परिषद ने हाल ही में एक आपात बैठक बुलाई है और इसमें 13 अखाड़ों के दो-दो प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे.

आपको बता दें कि प्रशासन ने 6 दिसंबर के बाद किसी तारीख पर अपनी कोई सभा या कार्यक्रम आयोजित करने की मांग पर एक बार विचार करने के लिए कहा है. ये बैठक संगम क्षेत्र में जूना अखाड़े के शिव मंदिर में आज सुबह करीब नौ बजे से शुरू होगी. माना जा रहा है कि इस बैठक में आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया जा सकता है.

अखाड़ों के साधू संतों ने अपना अयोध्या मार्च 4 और 5 तारीख को आयोजित किया था. लेकिन उसके बाद अखाड़ों ने ये साफ कर दिया था कि उनका मार्च कार्यक्रम अयोध्या प्रशासन की हामी के बाद ही आयोजित की जाएगी. अगर प्रशासन द्वारा  इस बात को लेकर सहमती नहीं मिलती है तो अखाड़े के पदाधिकारी और उनके कुछ प्रमुख संत अयोध्या में रहकर बैठक करेंगे और मंदिर निर्माण के लिए सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम करेंगे.

वहीं स्वामी स्वरूपानन्द का कहना है कि जन्म स्थान पर कोई परिवर्तन संभव नहीं है और मंदिर बनना तय है. उन्होंने कहा आज हिन्दुओं को धर्म के नाम पर बरगलाया जा रहा है. जहां कोई उन्हें दस-दस बच्चे पैदा करने की नसीहत दे रहा है तो कोई नये-नये छद्म भगवान ही बना दे रहा है.