कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति की पहल: दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया को वार्ता का नया प्रस्ताव भेजा
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने दशकों से चले आ रहे तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर कोरिया के समक्ष बातचीत का एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कोरियाई…
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने दशकों से चले आ रहे तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर कोरिया के समक्ष बातचीत का एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कोरियाई प्रायद्वीप पर स्थायी शांति स्थापित करने के मकसद से युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करने और प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने के लिए व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा शुरू करने की पेशकश की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ली का लक्ष्य मौजूदा अस्थिर युद्धविराम को एक स्थायी शांति व्यवस्था में बदलना है।
यह प्रस्ताव शनिवार को दक्षिण कोरिया के 81वें लिबरेशन डे के अवसर पर आयोजित एक समारोह के दौरान दिया गया। यह दिन 1910 से 1945 तक चले जापानी औपनिवेशिक शासन से कोरिया की मुक्ति की याद में मनाया जाता है। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने दोनों पक्षों से एक-दूसरे को धमकी देने की मानसिकता छोड़कर सीधी बातचीत की मेज पर आने का आह्वान किया।
युद्धविराम से स्थायी शांति की ओर
1950 से 1953 तक चले कोरियाई युद्ध की समाप्ति एक युद्धविराम समझौते के साथ हुई थी, लेकिन कोई औपचारिक शांति संधि नहीं हुई। इस वजह से, दोनों देश तकनीकी रूप से आज भी युद्ध की स्थिति में हैं। राष्ट्रपति ली ने इसी स्थिति को बदलने पर जोर देते हुए कहा, "दोनों कोरिया युद्ध समाप्त करने के लिए सीधे पक्षकार के तौर पर चर्चा शुरू कर सकते हैं और इसी प्रक्रिया में उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमताओं के विस्तार को रोकने के प्रभावी तरीकों पर भी विचार किया जा सकता है।"
शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर ज़ोर
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया का उद्देश्य बलपूर्वक एकीकरण या किसी भी तरह की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई करना नहीं है। उन्होंने कहा, "दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया की मौजूदा व्यवस्था का सम्मान करता है।" उन्होंने टकराव के बजाय शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता तलाशने और दोनों देशों के बीच अनावश्यक टकराव को कम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ली का यह प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्योंगयांग ने उनके प्रशासन की पिछली कई शांति पहलों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम इस पूरी पहल में सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रपति ली ने पहले भी प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से रोकने के लिए बातचीत की वकालत की है। अब इस नई पेशकश पर उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की यह पहल कितनी आगे बढ़ पाती है।
इनपुट: IANS



