राम मंदिर चढ़ावा विवाद: राजद सांसद मनोज झा बोले — 'ईश्वर को भी नहीं बख्शा', सपा ने SC जज की निगरानी में CBI जांच की उठाई माँग
राम मंदिर के दानपात्र में हुई कथित अनियमितता का मामला अब राजनीतिक गलियारों से आगे निकलकर आस्था और जवाबदेही के व्यापक सवाल बन गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा और समाजवादी पार्टी (सपा)
राम मंदिर के दानपात्र में हुई कथित अनियमितता का मामला अब राजनीतिक गलियारों से आगे निकलकर आस्था और जवाबदेही के व्यापक सवाल बन गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता उदयवीर — दोनों ने गुरुवार को इस मुद्दे पर केंद्र व राज्य सरकार को घेरा।
मनोज झा: 'यह विपक्ष का नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं का सवाल है'
सहरसा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि यह मामला सिर्फ विपक्षी दलों तक सीमित नहीं है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, "आप अगर इंसान के साथ धोखाधड़ी करते तो हमें समझ में भी आता, लेकिन अफसोस की बात है कि आपने ईश्वर को नहीं छोड़ा।" उन्होंने राम मंदिर के दानपात्र विवाद को उज्जैन लैंड स्कैम से जोड़ते हुए कहा कि राम और शिव — दोनों हिंदू धर्म के अहम प्रतीक हैं — और दोनों से जुड़े मामले एक साथ सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "अब लीपालोपी की कोशिश की जा रही है, जो बहुत ही महंगा पड़ने वाला है।"
झा ने भरत तिवारी के एनकाउंटर पर भी टिप्पणी की और कहा कि "यह सरकार सच का एनकाउंटर करने की कोशिश अब तक करती रही।"
'सम्राट सरकार' शब्द पर आपत्ति, बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल
मनोज झा ने 'सम्राट सरकार' जैसी शब्दावली पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था, "जब आप सम्राट सरकार कहते हैं, तो मैं चौंक जाता हूँ। आमतौर पर सरकार का चयन तो देश की जनता की ओर से किया जाता है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश सरकार के पक्ष में तो मतदान हुआ था, लेकिन सम्राट के पक्ष में कोई मतदान नहीं गया, इसलिए उस शब्द का प्रयोग उचित नहीं।
रौशन आनंद प्रकरण को लेकर उन्होंने बिहार की शिक्षा एवं कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "मैं खुद दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाता हूँ। मेरा मानना है कि कोचिंग वहीं पर फलीभूत होते हैं, जहाँ शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी होती है।"
सपा की माँग — सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में CBI जांच
सपा नेता उदयवीर ने राम मंदिर चढ़ावा मामले में चल रही SIT जांच को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि इस जांच ने लोगों की आशंका को सच साबित कर दिया है — छोटे कर्मचारियों को आगे करके बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट की सिटिंग जज की निगरानी में CBI को इस मामले की जांच करनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग लंबे समय तक ज़मीन औने-पौने दाम पर बेचते रहे, उन्हें चिन्हित कर उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
उदयवीर ने आरोप लगाया, "अगर वाकई में ये लोग राम भक्त हैं, तो आरोप लगने के बाद तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए था। इसके बाद ही निष्पक्ष जांच की माँग करनी चाहिए थी।" उन्होंने कहा कि विश्व परिषद से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगे हैं, इसलिए देश और दुनिया के सामने निष्पक्ष कार्रवाई की मिसाल पेश होनी चाहिए।
नृपेंद्र मिश्रा का हवाला — 'चोरी नहीं, डकैती हुई'
उदयवीर ने नृपेंद्र मिश्रा के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि "चोरी नहीं, डकैती हुई है। लूट लिया है सबने।" सपा नेता ने कहा कि जिन लोगों को राम मंदिर आंदोलन के दौरान सीएम योगी आदर्श मानते थे और ट्रस्ट की जिम्मेदारी सौंपी, वे अब झूठ बोलने के लिए बदनाम हो रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बड़े लोगों को संरक्षित करते हुए छोटे कर्मचारियों को सामने लाया जा रहा है।
योगी की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर सवाल, केजरीवाल के अयोध्या दर्शन पर भी प्रतिक्रिया
सपा नेता उदयवीर ने सीएम योगी की जीरो टॉलरेंस नीति पर तंज कसते हुए कहा, "15 दिनों तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही कोशिश थी कि मामले को दबाया जाए।" उन्होंने कहा कि इन लोगों को न अपराध से मतलब है, न अपराधियों से।
अरविंद केजरीवाल के अयोध्या दर्शन पर उठे विवाद को लेकर उदयवीर ने कहा, "आखिर ये ठेकेदार समाज में कहाँ से आ गए, जो यह तय करेंगे कि कौन दर्शन करेगा और कौन नहीं? भगवान तो हर जगह विराजमान हैं।"
अपनी बात समाप्त करते हुए उदयवीर ने भाजपा के 10 बजटों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर बजट में पीड़ित, दलित और शोषित वर्ग के साथ अन्याय हुआ और उनकी हिस्सेदारी नहीं दी गई।
इनपुट: IANS



