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रक्षा निर्यात हुआ और आसान: सरकार ने बदले नियम, भारतीय कंपनियों के लिए खुलेंगे दुनिया के बाज़ार

भारत के रक्षा उद्योग, विशेषकर छोटे और मझोले उद्यमों (MSMEs) के लिए वैश्विक बाज़ार में अपनी पहुँच बनाना अब और आसान हो जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सरकार ने रक्षा निर्यात से जुड़े नियमों में कई…

रक्षा निर्यात हुआ और आसान: सरकार ने बदले नियम, भारतीय कंपनियों के लिए खुलेंगे दुनिया के बाज़ार
(फोटो: IANS)

भारत के रक्षा उद्योग, विशेषकर छोटे और मझोले उद्यमों (MSMEs) के लिए वैश्विक बाज़ार में अपनी पहुँच बनाना अब और आसान हो जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सरकार ने रक्षा निर्यात से जुड़े नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिनका उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाकर भारतीय कंपनियों को दुनिया भर में तेज़ी से कारोबार करने में मदद करना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में हुए इन सुधारों से प्रक्रियागत बोझ कम होगा और भारत एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में और मज़बूत होगा।

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यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात दोनों ही रिकॉर्ड स्तर पर हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपए और रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया।

क्या हैं मुख्य बदलाव?

रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) व्यवस्था को ज़्यादा सरल और व्यापक बना दिया है। नई व्यवस्था के तहत, अधिकांश देशों को गैर-घातक रक्षा सामान भेजने के लिए अब हितधारकों से परामर्श की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और निविदाओं के लिए भी सभी प्रकार के रक्षा सामानों के निर्यात में यह शर्त हटा दी गई है। इससे भारतीय कंपनियाँ विदेशी टेंडरों में तेज़ी से हिस्सा ले सकेंगी और बिना ज़्यादा देरी के अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर पाएँगी।

सरल हुई OGEL व्यवस्था

ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) एकमुश्त मिलने वाली एक स्थायी निर्यात मंज़ूरी है, जिससे पात्र कंपनियों को हर खेप के लिए अलग-अलग अनुमति नहीं लेनी पड़ती। पहले इसके लिए तीन अलग-अलग SOP थीं, जिन्हें अब मिलाकर एक एकीकृत SOP बना दिया गया है। इससे निर्यातकों को एक समान और सरल नियमों का लाभ मिलेगा।

इसके अलावा, OGEL लाइसेंस की वैधता भी 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई है, जिससे कंपनियों का नवीनीकरण में लगने वाला समय और पैसा बचेगा। इस लाइसेंस के तहत निर्यात किए जा सकने वाले देशों का दायरा भी 41 से बढ़ाकर लगभग सभी देशों तक कर दिया गया है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित या हथियार प्रतिबंध झेल रहे देशों को इससे बाहर रखा गया है।

सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन सुधारों का मतलब सुरक्षा उपायों को कमज़ोर करना नहीं है। संवेदनशील देशों, महत्वपूर्ण तकनीकों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में पहले की तरह ही कड़े सुरक्षा प्रावधान लागू रहेंगे। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य केवल कम जोखिम वाले मामलों में अनावश्यक प्रक्रियाओं को हटाना है। नई व्यवस्था में विदेशी कंपनियों (FOEM) के साथ लंबे अनुबंध वाली भारतीय कंपनियों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे उन्हें ज़्यादा तरह के सामान निर्यात करने की सुविधा मिलेगी।

इनपुट: IANS

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