बैंक ऑफ बड़ौदा और बीआर शेट्टी के बीच 2,800 करोड़ रुपये का विवाद गहराया, जानें पूरा मामला
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा और यूएई के कारोबारी बी.आर. शेट्टी के बीच कानूनी लड़ाई और तेज हो गई है। बैंक ने शेट्टी से 2,800 करोड़ रुपये की वसूली के लिए भारत और यूएई, दोनों देशों में प्रक्रिया…
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा और यूएई के कारोबारी बी.आर. शेट्टी के बीच कानूनी लड़ाई और तेज हो गई है। बैंक ने शेट्टी से 2,800 करोड़ रुपये की वसूली के लिए भारत और यूएई, दोनों देशों में प्रक्रिया शुरू कर दी है और कई अदालती आदेश भी हासिल किए हैं। यह पूरा विवाद शेट्टी की कंपनी एनएमसी हेल्थ से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले से जुड़ा है, जिसके बाद कंपनी डूब गई थी।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला तब और गरमा गया जब एनएमसी हेल्थ के संस्थापक शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में मुकदमा दायर कर 15 अरब डॉलर के भारी मुआवजे की मांग कर दी। शेट्टी का आरोप है कि बैंक और उसके कुछ कर्मचारियों ने एक ऐसे फ्रॉड में मदद की, जिससे उनकी हेल्थकेयर कंपनी को भारी नुकसान हुआ।
बैंक का मज़बूत पक्ष और कानूनी कार्रवाई
इस मामले पर बैंक ऑफ बड़ौदा ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा है कि उसे अभी तक ऐसे किसी मुकदमे की सूचना नहीं मिली है और जब भी मिलेगी, वह अपने हितों की रक्षा के लिए मजबूती से अपना पक्ष रखेगा। बैंक ने यह भी बताया कि 2021 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने शेट्टी को अपनी संपत्ति का लेनदेन या उसे किसी और को ट्रांसफर करने से रोक दिया था। बाद में शेट्टी ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की कार्यवाही में खुद को दिवालिया बताते हुए बैंक का बकाया चुकाने में असमर्थता जताई थी।
पहले भी खारिज हो चुका है शेट्टी का मुकदमा
बैंक ने यह भी खुलासा किया कि शेट्टी ने इससे पहले न्यूयॉर्क राज्य की सुप्रीम कोर्ट में भी बैंक के खिलाफ इसी तरह का एक मुकदमा दायर किया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। गौरतलब है कि एनएमसी हेल्थ, जो कभी खाड़ी देशों की सबसे बड़ी निजी हेल्थकेयर कंपनी थी, को 2020 में एडमिनिस्ट्रेशन के तहत लाना पड़ा था। कंपनी पर 6.6 अरब डॉलर का कर्ज था, जो पहले बताए गए 2.1 अरब डॉलर के अनुमान से कहीं ज़्यादा था।
अबू धाबी कोर्ट में भी चल रहा है मामला
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुताबिक, यह मामला अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (एडीजीएम) कोर्ट में चल रही कार्यवाही का भी हिस्सा है। उस अदालत में शेट्टी और एनएमसी के पूर्व सीईओ प्रशांत मंगहट के खिलाफ धोखाधड़ी और गलत ट्रेडिंग के आरोपों पर फैसला सुरक्षित रखा गया था। हालांकि, एनएमसी ग्रुप के एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ समझौते के बाद बैंक के खिलाफ एडीजीएम की कार्यवाही रोक दी गई थी। बैंक ने स्पष्ट किया है कि जब तक कोई आदेश नहीं आता, उसे इस मामले में किसी संभावित नुकसान के लिए कोई प्रोविजन बनाने की जरूरत नहीं है।
इनपुट: IANS



