संसद की अंतिम मुहर: अब 'केरल' कहलाएगा 'केरलम', राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतज़ार
केरल राज्य को अब आधिकारिक तौर पर 'केरलम' के नाम से जाना जाएगा। बुधवार को राज्यसभा ने भी केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया, जिसके बाद इस बदलाव पर संसद की अंतिम मुहर लग गई…
केरल राज्य को अब आधिकारिक तौर पर 'केरलम' के नाम से जाना जाएगा। बुधवार को राज्यसभा ने भी केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया, जिसके बाद इस बदलाव पर संसद की अंतिम मुहर लग गई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले लोकसभा भी इस विधेयक को मंजूरी दे चुकी थी। अब इसे राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा।
सदन में चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि यह कदम केरल विधानसभा की सर्वसम्मत इच्छा पर आधारित है। 15वीं केरल विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम बदला जाए। सरकार का तर्क था कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम हमेशा से 'केरलम' ही रहा है।
नाम बदलने की पूरी प्रक्रिया
नित्यानंद राय ने सदन को प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार के अनुरोध को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। इसके बाद, केंद्र ने 'केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026' तैयार कर विचार के लिए वापस केरल विधानसभा को भेजा। वहाँ भी विधेयक के सभी खंडों को सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई, जिसके बाद इसे संसद में पेश किया गया।
उन्होंने कहा, "यह केरल के करोड़ों केरलमवासियों के प्रयास और भावनाओं की सफलता है। यह राज्य सरकार की सोच और उसके संकल्प की भी सफलता है।" मंत्री ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प की पूर्ति बताया, जिसके तहत देश की विरासत और संस्कृति से जुड़े गौरव को स्थापित करने तथा गुलामी के प्रतीकों को हटाने की बात कही गई है।
अन्य राज्यों के नाम बदलने पर भी चर्चा
इस विधेयक पर चर्चा के दौरान पश्चिम बंगाल और पटना के नाम बदलने के सुझाव भी सामने आए। पश्चिम बंगाल के बारे में राय ने कहा कि पहले 'बंगला', 'बंगाल' और 'बांग्ला' जैसे अलग-अलग नाम के प्रस्ताव आए थे, जिनमें एकरूपता नहीं थी। उन्होंने बताया कि अब 'पश्चिम बोंगो' नाम का अनुरोध किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव आता है, जो वहां के लोगों की भावनाओं और भारतीय विरासत से जुड़ा हो, तो केंद्र उस पर निश्चित रूप से विचार करेगा। इसी तरह, उन्होंने पटना का नाम पाटलिपुत्र करने जैसे सुझावों पर भी यही बात दोहराई कि ऐसे प्रस्तावों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आना चाहिए।
इनपुट: IANS



