मानसा: एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के बाद गतिरोध जारी, CBI जाँच और CM के इस्तीफे पर अड़ा परिवार
पंजाब के मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर गतिरोध बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार और जिला प्रशासन के बीच हुई…
पंजाब के मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर गतिरोध बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही, क्योंकि परिजन मुख्यमंत्री के इस्तीफे और मामले की CBI जांच की अपनी मांगों पर कायम हैं।
जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक अंतिम संस्कार करने से इनकार करते हुए परविंदर के परिवार और समर्थक मानसा में दो स्थानों पर धरना दे रहे हैं। एक प्रदर्शन मानसा के सिविल अस्पताल के बाहर चल रहा है, जबकि दूसरा डिप्टी कमिश्नर के आवास के पास तिकोनी चौक पर जारी है।
न्याय के लिए कई मांगें
परविंदर को न्याय दिलाने के लिए गठित एक समिति ने कई मांगें रखी हैं। इसमें मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने और पोस्टमार्टम चंडीगढ़ PGI के डॉक्टरों के एक पैनल से करवाने की मांग शामिल है। इंसाफ कमेटी ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से भी आग्रह किया है कि परविंदर सिंह को शहीद का दर्जा दिया जाए। इसके अलावा, परविंदर द्वारा बनाई गई एंटी-ड्रग टास्क फोर्स के सदस्यों की मांग है कि जिस दुकान के पास उनकी हत्या हुई, वहां उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए।
एक्टिविस्ट अवतार सिंह ने IANS से कहा, "चौथे दिन धरना शुरू हो चुका है। कमेटी की मांग है कि राज्य के मुख्यमंत्री और डीजीपी को अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन अभी तक कोई इस्तीफा नहीं हुआ है। इस्तीफा होने के बाद ही परविंदर सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा।"
विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए जत्थेदार
शुक्रवार को तिकोनी चौक पर हो रहे प्रदर्शन में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गढ़गाज भी शामिल हुए। उन्होंने नशे की समस्या को गंभीर बताते हुए कहा, "नशा धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता। जो कोई भी नशे की लत का शिकार होता है, वह प्रभावित होता है और 'चिट्टा' एक बहुत बड़ी समस्या है।"
जत्थेदार ने कहा कि परविंदर अपनी आवाज़ हर घर तक पहुंचा रहे थे और लोगों से अपने बच्चों को सिंथेटिक नशों से बचाने की अपील कर रहे थे। उन्होंने परिवार के हवाले से बताया, "नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वाले दुकानदार के यहां कई बार छापेमारी हुई और नशीले पदार्थ जब्त भी किए गए, फिर भी वह उन्हें बेचना जारी रखते थे।" परिवार का आरोप है कि परविंदर छह-सात दिनों से यह मुद्दा उठा रहे थे, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद उन्हें गोली का शिकार बना दिया गया। जत्थेदार ने परविंदर को 'शहीद' बताते हुए नशे के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।
इनपुट: IANS



