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पंजाब: नशा-विरोधी कार्यकर्ता की हत्या पर मानवाधिकार आयोग का कड़ा रुख, सरकार को भेजा नोटिस

पंजाब में नशीली दवाओं के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे…

पंजाब: नशा-विरोधी कार्यकर्ता की हत्या पर मानवाधिकार आयोग का कड़ा रुख, सरकार को भेजा नोटिस
(फोटो: IANS)

पंजाब में नशीली दवाओं के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे कानून-व्यवस्था की विफलता का स्पष्ट उदाहरण बताया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने इस संबंध में पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की है।

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यह मामला ड्रग्स के विरुद्ध अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या से जुड़ा है। एनएचआरसी के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस घटना को अत्यंत गंभीर करार दिया है। उन्होंने कहा, "पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ काम करने वाले एक एक्टिविस्ट की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना बेहद गंभीर है और दिखाती है कि ड्रग्स बेचने वाले इतने बेखौफ हो गए हैं कि उन्हें कानून-व्यवस्था का कोई डर नहीं है। यह कानून-व्यवस्था न होने का एक साफ उदाहरण है।"

सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल

कानूनगो ने न केवल इस अकेली घटना पर चिंता जताई, बल्कि पंजाब सरकार के रवैये पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार नशे के खिलाफ बोलने वालों को बर्दाश्त नहीं करती, तो ऐसी घटनाओं को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने दो घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा, "एक बार मुख्यमंत्री से जब ड्रग्स के खिलाफ एक व्यक्ति ने बात की तो उसे पीटा गया। एक अन्य मामले में एक व्यक्ति ने वित्त मंत्री की बैठक में ड्रग्स के खिलाफ बात की और कथित तौर पर उसे इतना प्रताड़ित किया गया कि उसने आत्महत्या कर ली।"

एनएचआरसी सदस्य के अनुसार, इस तरह की घटनाओं से नशा कारोबारियों के हौसले बुलंद होते हैं और उन्हें लगता है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा, "जब सरकार ड्रग्स के कारोबार में शामिल लोगों का साथ देती हुई दिखती है, तो यह एक गंभीर स्थिति होती है। यहां पर आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है।"

कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ज़ोर

आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसकी जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब सहित पूरे देश में नशे के खिलाफ काम करने वाले कार्यकर्ताओं की जान-माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार उठाए। कानूनगो ने कहा कि सरकार को अपनी रणनीति बदलनी होगी और यह स्पष्ट करना होगा कि वह नशा बेचने वालों पर प्रहार कर रही है, न कि उनके साथ खड़ी है।

इनपुट: IANS

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News4Social पंजाब डेस्क

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