शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
टेक्नोलॉजी

भारत की अपनी टाइम टेक्नोलॉजी: अब GPS पर नहीं रहेगी निर्भरता, 'वन नेशन, वन टाइम' की ओर बड़ा कदम

भारत ने पूरे देश में एक समान, सटीक और सुरक्षित समय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अब तक इस काम के लिए GPS जैसे विदेशी सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन 'व्हाइट रैबिट

भारत की अपनी टाइम टेक्नोलॉजी: अब GPS पर नहीं रहेगी निर्भरता, 'वन नेशन, वन टाइम' की ओर बड़ा कदम
(फोटो: IANS)

भारत ने पूरे देश में एक समान, सटीक और सुरक्षित समय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अब तक इस काम के लिए GPS जैसे विदेशी सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन 'व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी' पर आधारित एक नए नेटवर्क के शुरू होने से यह निर्भरता खत्म हो जाएगी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने गुरुवार को बेंगलुरु में इस उन्नत 'इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) - डिस्ट्रीब्यूशन डेमोंस्ट्रेशन नेटवर्क' का उद्घाटन किया।

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यह उद्घाटन कार्यक्रम बेंगलुरु के जक्कुर स्थित रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड्स लेबोरेटरी (आरआरएसएल) में हुआ। इस पहल को सरकार के 'वन नेशन, वन टाइम' के व्यापक दृष्टिकोण का एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे को बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित और संप्रभु बनाना है।

क्यों ज़रूरी है यह नई तकनीक?

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस मौके पर ज़ोर देकर कहा कि विदेशी टाइम सोर्स पर निर्भरता कम होने से देश के ज़रूरी क्षेत्र ज़्यादा सुरक्षित होंगे। इससे साइबर-हमले और डेटा में हेरफेर जैसे खतरों से बचाव होगा। यह हाई-प्रिसिजन टाइम सिंक्रोनाइज़ेशन तकनीक कई महत्वपूर्ण सेक्टरों के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकती है।

इनमें हाई-फ्रीक्वेंसी वाले फाइनेंशियल मार्केट, स्टॉक एक्सचेंज, डिजिटल बैंकिंग भुगतान, दूरसंचार नेटवर्क और राष्ट्रीय पावर ग्रिड की स्थिरता बनाए रखना शामिल है। इन सभी क्षेत्रों में कामकाज के लिए सेकंड के छोटे से छोटे हिस्से का भी सटीक होना बेहद ज़रूरी होता है।

स्वदेशी तकनीक और वैश्विक मानक

उपभोक्ता मामले मंत्रालय का लीगल मेट्रोलॉजी डिवीजन इस प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी है। इसे नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (एनपीएल), इसरो, बीएसएनएल और सेबी जैसे प्रमुख तकनीकी संस्थानों के सहयोग से विकसित किया गया है। मंत्री ने बताया कि यह स्वदेशी सिस्टम ग्लोबल कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (यूटीसी) प्रोटोकॉल के अनुरूप काम करता है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है और साथ ही भारत की आंतरिक सुरक्षा को भी मजबूत करता है।

जोशी ने भविष्य की ओर देखते हुए कहा कि यह यूनिफॉर्म टाइम प्रोटोकॉल भारत के प्रौद्योगिकी-संचालित डिजिटल गवर्नेंस और सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता के लिए एक बुनियादी स्तंभ का काम करेगा। इस कार्यक्रम में उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे, अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा और लीगल मेट्रोलॉजी के निदेशक आशुतोष अग्रवाल सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

इनपुट: IANS

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