PMO का OSD बनकर AIIMS में दिलाता था दाखिला, फ़र्ज़ी अधिकारी के ख़िलाफ़ CBI का एक्शन
नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का एक फ़र्ज़ी अधिकारी बनकर लोगों को भर्ती कराने का सनसनीखेज़ मामला सामने आया है। इस मामले में केंद्रीय जांच…
नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का एक फ़र्ज़ी अधिकारी बनकर लोगों को भर्ती कराने का सनसनीखेज़ मामला सामने आया है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली के एक व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। आरोपी की पहचान रवि कांत शर्मा के रूप में हुई है, जो खुद को प्रधानमंत्री का 'ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' (OSD) बताता था।
समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने यह मामला 31 अगस्त को दर्ज किया था। इसकी शुरुआत तब हुई जब प्रधानमंत्री कार्यालय के एक सहायक निदेशक ने मई 2026 में रवि कांत शर्मा के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में स्पष्ट कहा गया था कि आरोपी पीएमओ के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहा है और खुद को एक वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर पेश कर रहा है।
कैसे काम करता था फ़र्ज़ी OSD?
जांच में सामने आया कि रवि कांत शर्मा ने इसी साल 26 फरवरी 2026 को व्हाट्सएप के ज़रिए एम्स के प्रोटोकॉल ऑफिसर बी.एन. आचार्य से संपर्क किया था। उसने खुद को प्रधानमंत्री का ओएसडी बताकर एम्स अधिकारियों पर रौब जमाने की कोशिश की। अपनी पहचान को पुख्ता दिखाने के लिए उसने अपना ईमेल एड्रेस और पीएमओ का पोर्टल तक साझा किया, ताकि लगे कि वह शिकायतों और अन्य सेवाओं से जुड़ा अधिकारी है।
इसी पहचान का इस्तेमाल करते हुए शर्मा ने प्रोटोकॉल ऑफिसर पर मोहम्मद इमरान नाम के एक मरीज़ को इमरजेंसी विभाग में प्राथमिकता के आधार पर भर्ती करने और इलाज मुहैया कराने का दबाव बनाया। पीएमओ ने अपनी शिकायत में साफ किया कि रवि कांत शर्मा नाम का कोई भी व्यक्ति उनके यहां ओएसडी के पद पर कभी कार्यरत नहीं रहा है।
कई और मरीज़ों के लिए भी की थी सिफ़ारिश
सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, आरोपी ने सिर्फ एक ही मरीज़ के लिए ऐसा नहीं किया था। जांच के दौरान यह पता चला कि रवि कांत शर्मा ने कविता और अर्चना समेत कई अन्य मरीज़ों के मामलों में भी इसी तरह गैर-कानूनी तरीके से दखल देने का प्रयास किया था। एफआईआर में कहा गया है कि एम्स ने मरीज़ों को यह विशेष सुविधा सिर्फ इस गलतफहमी में दी थी कि आरोपी पीएमओ का एक अधिकृत अधिकारी है।
इनपुट: IANS



