पटना की बांकीपुर सीट पर उपचुनाव का रण: जन सुराज ने प्रशांत किशोर को बनाया उम्मीदवार
बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का मुकाबला अब और भी दिलचस्प हो गया है। राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर इस हाई-प्रोफाइल सीट से अपनी पार्टी 'जन सुराज' के उम्मीदवा
बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का मुकाबला अब और भी दिलचस्प हो गया है। राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर इस हाई-प्रोफाइल सीट से अपनी पार्टी 'जन सुराज' के उम्मीदवार होंगे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने रविवार को पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता में इस फैसले की आधिकारिक घोषणा की, जहाँ प्रशांत किशोर स्वयं भी उपस्थित थे।
इस घोषणा ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है जो काफी समय से चल रही थीं। प्रशांत किशोर पिछले कई हफ्तों से बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में लगातार जनसभाएं, नुक्कड़ बैठकें और स्थानीय लोगों से संवाद कर रहे थे, जिससे उनकी उम्मीदवारी के कयास लगाए जा रहे थे।
चुनाव लड़ने की जिम्मेदारी स्वीकारी
पार्टी द्वारा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद प्रशांत किशोर ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए नेतृत्व का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, "मैं पार्टी को धन्यवाद देता हूं और इस जिम्मेदारी को स्वीकार करता हूं। हम मजबूती के साथ बांकीपुर से चुनाव लड़ेंगे।" उन्होंने जनता का आशीर्वाद मिलने पर उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने और विधानसभा में उनकी आवाज़ उठाने का वादा किया।
किशोर ने आगे कहा, "मैं उन्हें आश्वस्त करता हूं कि पिछले चार वर्षों से जन सुराज ही मेरा जीवन रहा है और अगले दस वर्षों तक, जब तक बिहार में परिवर्तन का सपना साकार नहीं हो जाता, मेरा कोई और उद्देश्य नहीं है। मैं बांकीपुर उपचुनाव लड़ने की जिम्मेदारी को उस लक्ष्य की ओर एक कदम मानता हूं।"
क्यों अहम है यह उपचुनाव?
यह सीट भाजपा नेता और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई है। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, बांकीपुर विधानसभा सीट पर मतदान 30 जुलाई को होगा। प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने के बाद अब सभी की निगाहें भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के उम्मीदवारों पर टिकी हैं, जिनकी घोषणा के बाद ही चुनावी मुकाबले की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।
किशोर ने यह भी कहा कि नवंबर 2025 के नतीजों के बाद कई लोग निराश हुए थे, लेकिन उनका मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव में जीत से न केवल आंदोलन मजबूत होगा, बल्कि बिहार में बदलाव के सपने को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
इनपुट: IANS



