पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में भारी गिरावट, 80 हजार से घटकर 5100 पर आया आंकड़ा
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम कसने में बड़ी सफलता मिली है। कुछ साल पहले जहाँ 80 हजार से ज्यादा मामले सामने आते थे, वहीं पिछले साल यह संख्या घटकर मात्र 5100 रह गई। समाचार एजेंसी IANS की एक…
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम कसने में बड़ी सफलता मिली है। कुछ साल पहले जहाँ 80 हजार से ज्यादा मामले सामने आते थे, वहीं पिछले साल यह संख्या घटकर मात्र 5100 रह गई। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव किसानों की बदलती सोच और प्रशासन के साथ-साथ कृषि विभाग के मिले-जुले प्रयासों का नतीजा है।
आईसीएआर-अटारी के निदेशक डॉ. परविंदर श्योराण ने अबोहर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पराली कचरा नहीं, बल्कि किसानों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है, जिसे उन्हें अपने खेतों में ही सहेजना चाहिए। उन्होंने बताया कि धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच पराली प्रबंधन के तरीकों पर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच लगातार संवाद चल रहा है।
पराली जलाने के आंकड़ों में आई बड़ी कमी
डॉ. श्योराण ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जब 2018 में यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, तब देश भर में पराली जलाने की एक लाख से ज्यादा घटनाएं होती थीं, जिनमें से अकेले पंजाब में ही 80 हजार से अधिक मामले थे। यह कुल घटनाओं का लगभग 70-80 फीसदी था। उन्होंने कहा, "समय के साथ सभी के योगदान से इसमें भारी कमी आई। पिछले साल कुल घटनाएं घटकर 36 हजार रह गईं और उसमें पंजाब का हिस्सा सिर्फ 15 प्रतिशत (लगभग 5100) था।"
किसानों का बदला व्यवहार और तकनीक की भूमिका
इस सफलता का श्रेय मुख्य रूप से किसानों को देते हुए डॉ. श्योराण ने कहा कि सबसे अहम भूमिका किसान भाइयों की ही रही है। उन्होंने जोर दिया, "सबसे महत्वपूर्ण व्यवहार में बदलाव है और काफी हद तक किसानों ने यह बदलाव अपना लिया है।" उनके मुताबिक, पराली को खेत की मिट्टी में मिलाने या उसे सतह पर ही रखने की सभी आधुनिक तकनीकें अब किसानों के पास उपलब्ध हैं। अब यह उनकी पसंद पर निर्भर करता है कि वे कौन सी तकनीक अपनाना चाहते हैं।
डॉ. श्योराण ने यह भी स्पष्ट किया कि कई बार सैटेलाइट किसी अन्य वजह से लगी आग को भी पराली जलाने की घटना के रूप में दर्ज कर लेता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में सभी के एकजुट प्रयासों से 'जीरो बर्निंग' का सपना भी ज़रूर पूरा होगा।
इनपुट: IANS



