दक्षिण कोरिया ने OPCON हस्तांतरण पर दिया ज़ोर, राष्ट्रपति बोले- आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता मज़बूत करेंगे
दक्षिण कोरिया अपने सैन्य बलों का युद्धकालीन परिचालन नियंत्रण (OPCON) अमेरिका से वापस लेने की प्रक्रिया को तेज़ करना चाहता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा है कि उनका…
दक्षिण कोरिया अपने सैन्य बलों का युद्धकालीन परिचालन नियंत्रण (OPCON) अमेरिका से वापस लेने की प्रक्रिया को तेज़ करना चाहता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा है कि उनका प्रशासन इस लक्ष्य को उनके कार्यकाल के भीतर ही पूरा करने पर ज़ोर देगा, जो 2030 में समाप्त हो रहा है।
मंगलवार को एक कैबिनेट बैठक में राष्ट्रपति ली ने स्पष्ट किया, "ओपीकॉन का हस्तांतरण मेरे कार्यकाल के दौरान पूरा किया जाना चाहिए।" उन्होंने आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करने की आवश्यकता पर बल दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह अमेरिका के साथ देश के मज़बूत सैन्य गठबंधन के समानांतर होना चाहिए। उनके मुताबिक, स्वतंत्र रक्षा क्षमता और अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन एक-दूसरे के पूरक हैं।
OPCON का महत्व और सैन्य तैयारी
युद्धकालीन परिचालन नियंत्रण की यह व्यवस्था लंबे समय से दोनों देशों के बीच सैन्य गठबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। OPCON के हस्तांतरण के बाद, युद्ध की स्थिति में संयुक्त बलों का नेतृत्व करने में दक्षिण कोरिया की भूमिका और ज़िम्मेदारी काफ़ी बढ़ जाएगी। इसी तैयारी के तहत राष्ट्रपति ली ने अधिकारियों को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने की परियोजना में तेज़ी लाने का भी निर्देश दिया है।
वर्तमान सैन्य अभ्यास और क्षेत्रीय सुरक्षा
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका 'उलची फ्रीडम शील्ड' नामक अपना वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं। 27 अगस्त तक चलने वाले इस अभ्यास का एक मुख्य उद्देश्य उत्तर कोरिया के संभावित हमले की स्थिति में दोनों देशों की संयुक्त सैन्य क्षमता को मज़बूत करना और दक्षिण कोरिया की नेतृत्व क्षमता का आकलन करना है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों में बड़ी कटौती का निर्देश दिया है। पेंटागन ने कहा है कि वह इस निर्देश को लागू करने पर काम कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और OPCON हस्तांतरण की प्रक्रिया पर सभी की नज़रें टिक गई हैं। यह घटनाक्रम उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों तथा प्योंगयांग और मास्को के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग से उपजी सुरक्षा चिंताओं के बीच हो रहा है।
इनपुट: IANS



