गुरूवार, 23 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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इक्विटी ऑप्शंस बाज़ार में NSE की पकड़ ढीली, तीन साल में 22% से ज़्यादा हिस्सेदारी घटी

भारतीय शेयर बाज़ार के सबसे बड़े खिलाड़ी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में बादशाहत लगातार कम हो रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वित्त वर्षों में NSE…

इक्विटी ऑप्शंस बाज़ार में NSE की पकड़ ढीली, तीन साल में 22% से ज़्यादा हिस्सेदारी घटी
(फोटो: IANS)

भारतीय शेयर बाज़ार के सबसे बड़े खिलाड़ी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में बादशाहत लगातार कम हो रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वित्त वर्षों में NSE ने इस महत्वपूर्ण बाज़ार में अपनी 22 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी खो दी है, जो इसके एकाधिकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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NSE की वार्षिक रिपोर्ट्स और रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में दिए गए आँकड़ों से यह गिरावट साफ दिखती है। वित्त वर्ष 2023-24 में इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम वैल्यू) में NSE का मार्केट शेयर 96.9 प्रतिशत था, जो अगले साल यानी 2024-25 में घटकर 87.4 प्रतिशत रह गया। यह गिरावट वित्त वर्ष 2025-26 में भी जारी रही और हिस्सेदारी 74.71 प्रतिशत पर आ गई। इस तरह, तीन सालों के भीतर NSE की बाज़ार हिस्सेदारी में कुल 22.2 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

अन्य सेगमेंट में दबदबा कायम

हालांकि, इक्विटी ऑप्शंस में गिरावट के बावजूद, दूसरे बाज़ारों में NSE की स्थिति मज़बूत बनी हुई है। इक्विटी कैश सेगमेंट में इसकी हिस्सेदारी लगभग स्थिर रही, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 92.7 प्रतिशत, 2024-25 में 93.6 प्रतिशत और 2025-26 में 92.99 प्रतिशत थी। इसी तरह, इक्विटी फ्यूचर्स में तो इसका लगभग एकाधिकार है, जहाँ हिस्सेदारी तीनों वित्त वर्षों में क्रमशः 99.9 प्रतिशत, 99.9 प्रतिशत और 99.79 प्रतिशत रही।

कमज़ोर वित्तीय प्रदर्शन

बाज़ार हिस्सेदारी के साथ-साथ एक्सचेंज के वित्तीय प्रदर्शन में भी कमज़ोरी देखी गई है। IPO लाने की तैयारी कर रही NSE की परिचालन से कुल आय में भी गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2025 में जहाँ यह आय 17,140.67 करोड़ रुपए थी, वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह 3 प्रतिशत से अधिक घटकर 16,601.30 करोड़ रुपए रह गई।

इस दौरान, आय का मुख्य स्रोत माने जाने वाले ट्रांजैक्शन चार्जेज से होने वाली कमाई भी 4 प्रतिशत घटी है। यह आंकड़ा 13,635.76 करोड़ रुपए से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपए पर आ गया। इसके अलावा, क्लियरिंग और सेटलमेंट सेवाओं से होने वाली आय में भी वित्त वर्ष 2026 में 21.8 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो 321.34 करोड़ रुपए से घटकर 251.45 करोड़ रुपए रह गई।

इनपुट: IANS

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