अब नहीं कर सकेंगे माउंट एवेरेस्ट पर चढ़ाई

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नेपाल सरकार ने अकेले चढ़ाई करने वाले पर्वतारोहियों पर रोक लगा दी है. जिसका सीधा मतलब यह हुआ की अब नेपाल में विदेशी पर्यटक माउंट एवेरस्ट पर अकेले चढ़ाई नहीं कर सकेंगे. ‘नेपाल माउंटेनीरिंग एसोसिएशन’ (NMA) के अध्यक्ष सांता बियर लामा ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा , “नेपाल के पहाड़ अपने आप में अनूठे हैं, और यह उचित होगा अगर पर्वतारोही किसी गाइड के साथ चढ़ाई करें, यह फैसला पर्वतारोहियों की सुरक्षा के हित में लिया गया है”. नेपाल सरकार की ओर से आये बयान में कहा गया है की, “पर्वतारोहण के दौरान हादसे में कमी लाने के मकसद से अकेले पवर्तारोहियों के माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने पर प्रतिबंध लगा दिया है”. यह प्रतिबन्ध अगले सीजन अर्थात बसंत ऋतू से लागू होगा न केवल एकल पर्वतारोहियों पर रोक लगी है बल्कि, नेत्रहीन एवं अपंग पर्वतारोहियों पर भी बिना मेडिकल सर्टिफिकेट और गाइड के चढ़ाई करने पर भी रोक लगा दी गयी है.

नेपाल, एक खूबसूरत राष्ट्र है जो हिमालय पहाड़ों की श्रृंखला के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है और यहाँ हर साल पूरे विश्व से पर्वतारोही, पर्वतारोहण करने आते हैं. दुनिया की सबसे ऊँची चोटी के तौर पर विख्यात माउंट एवेरस्ट नेपाल में ही स्थित है और नेपाल सरकार को पर्यटन से ख़ासा मुनाफा होता है, इस फैसले को इसी मद्देनजर लाया गया है की पर्यटन के साथ लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा सके. इसके अलावा गाइड की मौजूदगी को अनिवार्य बना कर नेपाल सरकार वहां के लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाना चाहती है.

अगर आंकड़ों की बात की जाये तो नेपाल के आधिकारिक रपट के अनुसार नेपाल में 1953 से लेकर अबतक माउंट एवेरेस्ट पर चढ़ाई करने के प्रयास में 300 लोग मारे जा चुके हैं और ऐसा माना जाता है की वहां अभी भी कई शव दबे हो सकते हैं. हाल ही में ‘मीन बहादुर शेंचा’, जिनका नाम विश्व में माउंट एवेरेस्ट फतह करने वाले सबसे बुजुर्ग व्यक्ति के तौर पर जाना जाता था, उन्होंने इस ख़िताब को बरक़रार रखने के प्रयास में अपनी जान गँवा दी. और ‘ऊली स्टेक’, जिन्हे ‘स्विस मशीन’ के नाम से भी जाना जाता था, उन्होंने अकेले पर्वतारोहण करते वक़्त अपनी जान गँवा दी.

एक रपट के मुताबिक एवेरस्ट पर चढ़ाई करते वक़्त मौत का सबसे बड़ा कारण, हिमस्खलन है उसके बाद चढ़ाई करते वक़्त बैलेंस खो जाने से गिर जाने की घटनाएं भी बहुतायत में हैं. मालूम चलता है की नेपाल सरकार ने इन घटनाओं को बहुत गंभीरता से लिया और उसके बाद ऐसा निर्णय लिया है.

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