नोएडा में फिर लापरवाही का शिकार बना एक इंजीनियर, खुले नाले में गिरने से 27 साल के आर्यन की मौत
नोएडा में एक बार फिर प्राधिकरण की लापरवाही ने एक युवा की जान ले ली है। भारी बारिश के बाद हुए जलभराव के बीच एक खुले नाले में गिरने से 27 वर्षीय इंजीनियर आर्यन की दर्दनाक मौत हो गई। समाचार एजेंसी IANS क
नोएडा में एक बार फिर प्राधिकरण की लापरवाही ने एक युवा की जान ले ली है। भारी बारिश के बाद हुए जलभराव के बीच एक खुले नाले में गिरने से 27 वर्षीय इंजीनियर आर्यन की दर्दनाक मौत हो गई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना शहर में सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर करती है, जहां इस तरह के हादसे पहले भी हो चुके हैं।
मूल रूप से फर्रुखाबाद के रहने वाले आर्यन गुरुवार सुबह करीब 9 बजे सेक्टर-58 स्थित अपने दफ्तर जा रहे थे। रात भर की बारिश के कारण सड़क पानी से लबालब थी और नाले के स्लैब भी डूबे हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रास्ते में एक स्लैब टूटा हुआ था, जो पानी के नीचे दिखाई नहीं दिया। जैसे ही आर्यन वहां से गुजरे, उनका पैर फिसल गया और वह सीधे गहरे नाले में जा गिरे। लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। बाद में उनका शव निकाला गया।
लगातार हादसों से नहीं लिया सबक
आर्यन के परिजनों ने इस घटना के लिए नोएडा प्राधिकरण और संबंधित विभागों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अगर नाले सुरक्षित होते, टूटे स्लैब समय पर बदले जाते और जलभराव की समस्या का समाधान किया गया होता, तो आज आर्यन जिंदा होते। परिवार ने पुलिस में शिकायत करने की बात कही है।
यह कोई अकेली घटना नहीं है। इसी साल जनवरी में सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन साइट के पास बारिश के पानी से भरे गड्ढे में डूबने से इंजीनियर युवराज की मौत हो गई थी। इसके कुछ समय बाद ही एमिटी विश्वविद्यालय के एक छात्र की भी इसी तरह एक निर्माणाधीन स्थल पर पानी से भरे गड्ढे में डूबने से जान चली गई थी।
अधूरे वादे और अनसुनी शिकायतें
IANS के मुताबिक, हर हादसे के बाद जांच समितियां बनती हैं और सुरक्षा के निर्देश जारी होते हैं, जैसे खुले गड्ढों को ढकना, बैरिकेडिंग करना और चेतावनी बोर्ड लगाना, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। युवराज मामले की जांच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि शहर के कई सेक्टरों में खुले नाले, टूटे स्लैब और निर्माणाधीन स्थलों पर गहरे गड्ढे आज भी एक बड़ी समस्या हैं और शिकायतों पर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं होती।
आर्यन की मौत ने एक बार फिर वही सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इन हादसों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी।
इनपुट: IANS



