भोटेकोशी बाढ़ त्रासदी: नेपाल की संसद ने विशेष प्रस्ताव पारित किया, 1000 से ज़्यादा शव बरामद
नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी तबाही का मंज़र भयावह बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1003 शव बरामद किए जा…
नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी तबाही का मंज़र भयावह बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1003 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 4,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल की नेशनल असेंबली (संसद) ने इस बाढ़ पर एक विशेष प्रस्ताव पारित किया है।
मंगलवार को हुई बैठक में नेशनल असेंबली के स्पीकर नारायण प्रसाद दहल द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को सदन ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। प्रस्ताव में रसुवा में आई बाढ़ से हुए जान-माल के भारी नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया गया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई गई।
सरकार से राहत और पुनर्वास की अपील
पारित प्रस्ताव के माध्यम से संसद ने नेपाल सरकार से कई अहम कदम उठाने का आग्रह किया है। इसमें कहा गया है, "इस प्रस्ताव के माध्यम से नेपाल सरकार से अनुरोध है कि वह बचाव, राहत, पुनर्वास, लापता लोगों की खोज, घायलों के मुफ्त इलाज, शवों के वैज्ञानिक प्रबंधन और भौतिक संरचनाओं के पुनर्निर्माण पर विशेष ध्यान दे।" प्रस्ताव में आपदा प्रबंधन के लिए सभी स्तर की सरकारों, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच समन्वय सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
'दूसरों के विकास की कीमत चुका रहे'
सदन में चर्चा के दौरान नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की सांसद मदन कुमारी शाह ने इस आपदा के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, "हमें जहर दिया गया है। हमें दूसरों के विकास की वजह से तबाही झेलनी पड़ रही है। भोटेकोशी में बाढ़ के दर्द से देश कराह रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण नेपाल के पहाड़ पिघल रहे हैं, जिसके विनाशकारी परिणाम सामने आ रहे हैं।
राहत एवं बचाव कार्य जारी
नेपाल सेना और कई स्वयंसेवक रसुवा, तिमुरे, त्रिशूली और धुंचे जैसे इलाकों में बचाव कार्यों में जुटे हैं। बाढ़ के शव रसुवा के अलावा चितवन, धाडिंग, तनहुं, गोरखा, नुवाकोट और नवलपरासी ईस्ट तक पाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों की टीम बाढ़ के सटीक कारणों की जांच कर रही है। सरकार ने राहत कार्यों में पारदर्शिता और एकरूपता लाने के लिए 'सिंगल-डोर पॉलिसी' लागू की है, जिसके तहत सारी मदद प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष के जरिए वितरित की जाएगी। हालांकि, हताहतों और लापता लोगों को लेकर अभी तक कोई संयुक्त आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की गई है।
इनपुट: IANS



