NEET-UG विवाद: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया — परीक्षा सुधार पर नंदन नीलेकणी समिति 3 महीने में देगी रिपोर्ट
नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है। समाचार एजेंसी…
नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, एक हलफनामे में सरकार ने बताया है कि इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि इसी समिति की सिफारिशों के आधार पर भविष्य में परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव किए जाएँगे। सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि भविष्य में नीट-यूजी परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराया जाए, ताकि पेपर लीक की आशंका को कम किया जा सके। हालाँकि, इस पर अंतिम निर्णय समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा।
कड़े कानून और सुरक्षा उपाय
हलफनामे में केंद्र ने पेपर लीक और नकल जैसे अपराधों से निपटने के लिए बनाए गए एक नए कानून का भी जिक्र किया, जिसे 2026 में लागू किया जाएगा। इस कानून के तहत, परीक्षा में किसी भी तरह की धांधली करने वालों पर 10 साल तक की जेल और 5 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। सरकार का उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाना है।
इसके अलावा, 21 जून को आयोजित हुई दोबारा परीक्षा के दौरान किए गए सुरक्षा इंतजामों का भी ब्योरा दिया गया। सरकार ने बताया कि देशभर के परीक्षा केंद्रों पर 51,311 जैमर और 1.38 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। परीक्षा की निगरानी और अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक जाँच के लिए 87,000 कर्मचारियों को तैनात किया गया था।
इनपुट: IANS



