सोमवार, 2 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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नौसेना को मिलेंगे ₹54,000 करोड़ के 8 स्वदेशी युद्धपोत, GRSE और GSL करेंगे निर्माण

भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति को एक नई धार मिलने जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए आठ अत्याधुनिक 'नेक्स्ट-जनरेशन कॉर्वेट' युद्धपोतों के निर्माण के लिए लगभग 54,000 करोड़ रुपये के दो बड़े…

नौसेना को मिलेंगे ₹54,000 करोड़ के 8 स्वदेशी युद्धपोत, GRSE और GSL करेंगे निर्माण
(फोटो: IANS)

भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति को एक नई धार मिलने जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए आठ अत्याधुनिक 'नेक्स्ट-जनरेशन कॉर्वेट' युद्धपोतों के निर्माण के लिए लगभग 54,000 करोड़ रुपये के दो बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ये करार कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ किए गए हैं।

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नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में 2 नवंबर को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में इन करारों को अंतिम रूप दिया गया। कुल 53,866.50 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत GRSE पांच युद्धपोतों का निर्माण करेगा, जबकि GSL तीन युद्धपोत तैयार करेगा। यह पहली बार है जब भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए युद्धपोतों का निर्माण रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा किया जाएगा।

युद्धपोतों की क्षमता और भूमिका

ये अगली पीढ़ी के कॉर्वेट युद्धपोत आधुनिक मिसाइलों, हथियारों और सेंसर प्रणालियों से लैस होंगे। इनकी मदद से नौसेना हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे मौजूद किसी भी खतरे से प्रभावी ढंग से निपट सकेगी। ये युद्धपोत नौसेना की अभियान क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे। इनकी मुख्य भूमिकाओं में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाना और पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करना शामिल होगा। इसके अलावा, ये तटीय सुरक्षा को मजबूत करने और उथले समुद्री इलाकों में सैन्य अभियान चलाने में भी सक्षम होंगे।

'मेक इन इंडिया' को बड़ा बढ़ावा

यह परियोजना सिर्फ नौसेना की ताकत ही नहीं बढ़ाएगी, बल्कि देश के रक्षा और जहाज निर्माण उद्योग के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगी। इसमें रक्षा उपक्रमों के साथ-साथ निजी शिपयार्ड, औद्योगिक साझेदार और बड़ी संख्या में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) भी शामिल होंगे। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इससे देश में रक्षा उत्पादन में विदेशी निर्भरता घटेगी और घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलेगी।

इस परियोजना से अगले 10 वर्षों में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद है। मंत्रालय का अनुमान है कि सीधे शिपयार्ड में लगभग 72 लाख 'पर्सन-डे' का रोजगार सृजित होगा, जबकि सहायक उद्योगों और MSME क्षेत्र में करीब 460.72 लाख 'पर्सन-डे' के रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस तरह यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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