तमिलनाडु में आविन दूध 5 रुपये महंगा हो सकता है, दाम बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार के पास
तमिलनाडु में लाखों लोगों के लिए दूध की कीमतें जल्द ही बढ़ सकती हैं। राज्य की सबसे बड़ी सहकारी दुग्ध आपूर्तिकर्ता कंपनी 'आविन' ने दूध के दाम 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा…
तमिलनाडु में लाखों लोगों के लिए दूध की कीमतें जल्द ही बढ़ सकती हैं। राज्य की सबसे बड़ी सहकारी दुग्ध आपूर्तिकर्ता कंपनी 'आविन' ने दूध के दाम 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने कहा है कि दूध उत्पादन और वितरण की बढ़ती लागत को देखते हुए यह बढ़ोतरी ज़रूरी हो गई है। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
प्रस्ताव के अनुसार, बढ़ाई जाने वाली 5 रुपये की राशि में से 4 रुपये सहकारी समितियों को मिलेंगे, जबकि 1 रुपया दूध बेचने वाले दुकानदारों (आउटलेट संचालकों) के हिस्से में जाएगा। इस कदम का मकसद दूध विक्रेताओं की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है, जो लंबे समय से कमीशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
विक्रेताओं और संस्था पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?
आविन दूध की मांग बहुत ज़्यादा है, क्योंकि इसकी कीमतें निजी ब्रांडों की तुलना में काफी कम हैं। वर्तमान में, आविन का 500 मिलीलीटर का नारंगी पैकेट 30 रुपये, हरा और बैंगनी पैकेट 24 रुपये और नीला पैकेट 20 रुपये में मिलता है। दूध विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें हर पैकेट पर सिर्फ 75 पैसे का कमीशन मिलता है, जो दुकान का किराया, बिजली बिल और दूसरे खर्च निकालने के लिए नाकाफी है। इसी आर्थिक तंगी के कारण कई नए आविन आउटलेट खुलने के कुछ महीनों के भीतर ही बंद हो गए।
वहीं, आविन और निजी ब्रांड के दूध की कीमतों में बड़ा अंतर होने से होटल, चाय की दुकानें और मिठाई विक्रेता जैसे व्यावसायिक ग्राहक भारी मात्रा में आविन दूध खरीद रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि निजी कंपनियां 75 रुपये प्रति लीटर से भी ज़्यादा कीमत पर दूध बेच रही हैं। इस वजह से कई बार आम घरेलू ग्राहकों के लिए दूध की उपलब्धता कम हो जाती है।
बढ़ती लागत और दूध की आपूर्ति का गणित
आविन रोज़ाना लगभग 35 लाख लीटर दूध की खरीद करता है, जिसमें से अकेले चेन्नई में ही करीब 15 लाख लीटर की बिक्री होती है। कंपनी का कहना है कि कम बिक्री मूल्य का दबाव किसानों से लेकर सहकारी समितियों और खुदरा विक्रेताओं तक, सभी पर पड़ रहा है। हाल ही में सरकार ने किसानों के लिए दूध खरीद का मूल्य बढ़ाया था, लेकिन अब सहकारी संस्था और उसके वितरण नेटवर्क की वित्तीय चुनौतियों का समाधान करना भी ज़रूरी हो गया है।
आविन ने अपने प्रस्ताव में पड़ोसी राज्य कर्नाटक का भी उदाहरण दिया है, जहां हाल ही में दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई थी। फिलहाल, यह प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन है और कीमतें तभी बढ़ेंगी जब इसे आधिकारिक मंजूरी मिल जाएगी।
इनपुट: IANS



