नासिक कुंभ: राष्ट्रपति मुर्मू की मौजूदगी में होगा ध्वजारोहण, 6500 आदिवासी करेंगे महाआरती
महाराष्ट्र के नासिक में आगामी सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के तहत होने जा रहे एक भव्य आयोजन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 31 अक्टूबर को ध्वजारोहण करेंगी। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, इस…
महाराष्ट्र के नासिक में आगामी सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के तहत होने जा रहे एक भव्य आयोजन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 31 अक्टूबर को ध्वजारोहण करेंगी। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण 550 लोगों का सामूहिक शंखनाद और 6,500 आदिवासी बंधुओं द्वारा की जाने वाली महाआरती होगी।
अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता भक्ति चरण दास महाराज ने बताया कि प्रशासन 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुंभ के इतिहास में पहली बार किसी राष्ट्रपति का आगमन नासिक और पूरे महाराष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य जी ने भी इस अवसर को हर्ष और गौरव का क्षण बताया।
महिला नेतृत्व को सम्मान
प्रवक्ता भक्ति चरण दास महाराज ने इस बात पर जोर दिया कि यह आयोजन महिला नेतृत्व को एक विशेष सम्मान भी देगा। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति एक महिला हैं, हमारे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद पर भी महिला हैं, नासिक की प्रथम नागरिक महापौर भी महिला हैं और नासिक महानगरपालिका की आयुक्त भी महिला हैं।" उनके अनुसार, यह पूरा नियोजन राष्ट्रपति के मान-सम्मान को ध्यान में रखकर किया गया है।
एकता का संदेश और ऐतिहासिक क्षण
इस कार्यक्रम के माध्यम से संत समाज और विश्व को एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है। भक्ति चरण दास महाराज के अनुसार, एक पुरानी परंपरा को समाप्त करते हुए त्र्यंबकेश्वर और नासिक के संतों को एक मंच पर लाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हम इस भेदभाव को समाप्त करते हुए 13 अखाड़ों के सभी श्रीमहंतों, शंकराचार्यों, रामानंदाचार्यों और वैष्णवाचार्यों को एक मंच पर लेकर आ रहे हैं।"
जगद्गुरु नरेंद्राचार्य जी ने कहा कि साधु-संतों की उपस्थिति में राष्ट्रपति द्वारा वैदिक संकल्प के साथ ध्वजारोहण एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण होगा। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर सभी हिंदू संगठनों का एक साथ आना और 13 अखाड़ों के संतों द्वारा मिलकर आरती करना सनातन परंपरा की एकता का प्रतीक है। आयोजन में पर्यावरण संरक्षण और संस्कृति जागरण जैसे विषयों पर झांकियों के माध्यम से संदेश भी दिया जाएगा।
इनपुट: IANS



