गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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महाराष्ट्र: सूखा राहत पर उद्धव गुट का सरकार पर तीखा हमला, ₹5000 की मदद को बताया 'छलावा'

महाराष्ट्र में सूखे से जूझ रहे किसानों के लिए राज्य सरकार की ₹5,000 की अग्रिम राहत घोषणा पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने कड़ा प्रहार किया है। पार्टी ने इस मदद को 'धोखाधड़ी और खोखला दिखावा'…

महाराष्ट्र: सूखा राहत पर उद्धव गुट का सरकार पर तीखा हमला, ₹5000 की मदद को बताया 'छलावा'
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र में सूखे से जूझ रहे किसानों के लिए राज्य सरकार की ₹5,000 की अग्रिम राहत घोषणा पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने कड़ा प्रहार किया है। पार्टी ने इस मदद को 'धोखाधड़ी और खोखला दिखावा' बताते हुए कहा है कि इससे संकटग्रस्त किसानों की समस्याओं का कोई समाधान नहीं होगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' में एक संपादकीय के जरिए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

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उद्धव ठाकरे गुट का आरोप है कि सरकार ने 1.50 करोड़ सूखा प्रभावित किसानों के साथ खड़े होने के बजाय, उनकी पीठ में छुरा घोंपा है। संपादकीय में इस बात पर जोर दिया गया है कि सरकार के बड़े-बड़े दावों के उलट, यह राहत राशि बिना शर्त नहीं है, बल्कि इसे कई जटिल नियमों में उलझा दिया गया है।

सहायता पर '33 प्रतिशत' की शर्त

शिवसेना (UBT) ने बताया कि सरकारी घोषणा के अनुसार, ₹5,000 की यह अग्रिम सहायता केवल उन्हीं किसानों को मिलेगी, जहां फसल नुकसान का आकलन (पंचनामा) पूरा हो चुका है और यह नुकसान 33 प्रतिशत से अधिक पाया गया है। पार्टी का दावा है कि इस सख्त शर्त के कारण प्रदेश के लगभग आधे किसान, जो सूखे की भीषण मार झेल रहे हैं, इस राहत से पूरी तरह वंचित रह जाएंगे।

जमीनी हकीकत और किसानों की आत्महत्या

संपादकीय में ग्रामीण महाराष्ट्र की गंभीर स्थिति का भी जिक्र किया गया है। खरीफ की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, और बारिश की कमी के कारण रबी की बुवाई भी असंभव लग रही है, जिससे पीने के पानी और पशुओं के चारे का संकट गहरा गया है।

भले ही सरकार ने कर्ज वसूली के लिए किसानों को परेशान करने वाले साहूकारों और निजी फाइनेंस कंपनियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन किसानों को डराने-धमकाने का सिलसिला जारी है। संपादकीय में नांदेड़ और लातूर में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं का हवाला देते हुए पूछा गया है कि क्या सरकारी आदेश जमीन पर पहुंच भी रहे हैं?

देर से उठाए गए कदमों पर सवाल

पार्टी ने मानसून बीत जाने के कई हफ्तों बाद मृदा एवं जल संरक्षण विभाग द्वारा पानी सोखने वाले गड्ढे खोदने के काम पर भी तंज कसा है। शिवसेना ने इसे 'बहुत देर से उठाया गया कदम' बताते हुए सवाल किया कि जब बारिश की कोई उम्मीद ही नहीं है, तो क्या सरकार इन हजारों गड्ढों को पानी के टैंकरों से भरने की योजना बना रही है? संपादकीय में आरोप लगाया गया कि ऐसी परियोजनाएं किसानों की प्यास बुझाने के बजाय ठेकेदारों और बिचौलियों की जेबें भरने का काम करती हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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