किसानों को मिला MSP का मजबूत सहारा: भुगतान 8.36 लाख करोड़ रुपये के पार, खरीद में भी बड़ा उछाल
भारत में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर होने वाली रबी फसलों की खरीद और भुगतान में पिछले दो दशकों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS द्वारा जारी आधिकारिक फैक्टशीट के आंकड़ों…
भारत में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर होने वाली रबी फसलों की खरीद और भुगतान में पिछले दो दशकों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS द्वारा जारी आधिकारिक फैक्टशीट के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2004-05 से 2025-26 के बीच किसानों को किया जाने वाला MSP भुगतान 2.65 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 8.36 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसी अवधि में छह प्रमुख रबी फसलों की कुल खरीद भी 2,302 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 3,921 लाख मीट्रिक टन हो गई है।
यह आंकड़े कृषि क्षेत्र में सरकारी खरीद के बढ़ते महत्व को दर्शाते हैं। सरकार हर साल 'कृषि लागत और मूल्य आयोग' (CACP) की सिफारिशों के आधार पर 22 प्रमुख फसलों के लिए MSP की घोषणा करती है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना और उन्हें फसल विविधीकरण (यानी अलग-अलग तरह की फसलें उगाने) के लिए प्रोत्साहित करना है।
रबी सीजन 2027-28 के लिए MSP में बढ़ोतरी
हाल ही में 30 सितंबर को सरकार ने रबी विपणन सत्र (RMS) 2027-28 के लिए भी सभी निर्धारित रबी फसलों के MSP में वृद्धि को मंजूरी दी है। इस सीजन में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम के लिए 675 रुपए प्रति क्विंटल की गई है। इसके बाद रेपसीड-सरसों (413 रुपए प्रति क्विंटल), मसूर (390 रुपए प्रति क्विंटल) और जौ (136 रुपए प्रति क्विंटल) का स्थान है। गेहूं और चने के MSP में भी पिछले साल की तुलना में वृद्धि हुई है।
आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, RMS 2027-28 के दौरान किसानों को 324 लाख मीट्रिक टन उपज के लिए लगभग 90,962 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा। फैक्टशीट में यह भी बताया गया है कि उत्पादन लागत पर मुनाफे के मामले में गेहूं सबसे आगे है, जिस पर किसानों को 106% का मार्जिन मिलने का अनुमान है। इसके बाद रेपसीड-सरसों (96%), मसूर (92%) और चना (59%) हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से पारदर्शिता और आसानी
फैक्टशीट में इस बात पर जोर दिया गया है कि खरीद और भुगतान की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका बढ़ी है। इसमें कहा गया है, "मूल्य की गारंटी, खरीद का विस्तार और तकनीक-आधारित डिलीवरी मिलकर किसानों की बाजारों तक पहुंच को मजबूत कर रहे हैं और कृषि संबंधी फैसलों में उनका भरोसा बढ़ा रहे हैं।"
उदाहरण के लिए, 19 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़े देखें:
- 'ई-संयुक्त' प्लेटफॉर्म के जरिए 43 लाख से ज्यादा किसानों से 37.45 लाख मीट्रिक टन से अधिक उपज खरीदी गई। इसके बदले किसानों के खातों में 13,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम जमा की गई।
- वहीं, 'ई-समृद्धि' प्लेटफॉर्म पर 1.37 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत हैं, जिसके माध्यम से 2.25 करोड़ यूनिट से ज्यादा उपज की खरीद हुई और 81 लाख से अधिक बार भुगतान किया गया।
इनपुट: IANS



